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तिब्बत की मंडी तकलाकोट से लौटे सभी व्यापारी
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:58 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। भारत तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भाग लेने तिब्बत की मंडी तकलाकोट गए सभी व्यापारी मंगलवार सुबह 11 बजे लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय क्षेत्र में आ गए हैं। इसी के साथ इस वर्ष का व्यापार संपन्न हो गया है। तिब्बत से मंगलवार को अंतिम जत्थे में 42 व्यापारी और 35 सहायक लौटे।
इधर, गुंजी में तैनात कस्टम अधिकारी योगेश गंभीर 29 अक्तूबर को ही गुंजी से धारचूला को आ गए हैं। गुंजी में कस्टम विभाग का कोई अधिकारी न होने से व्यापारियों को गुंजी से सामान धारचूला लाने में कठिनाई होगी। तिब्बत से लाए जाने वाले हर सामान की कस्टम विभाग जांच करता है और उस पर कस्टम शुल्क का निर्धारण करता है। गुंजी में कस्टम विभाग के दो कर्मचारी हैं, लेकिन बिना अधिकारी के वह सामान की जांच नहीं कर सकते।
तिब्बत व्यापार में भाग लेकर मंगलवार को गुंजी पहुंचे व्यापारी जगदीश सिंह, दिनेश सिंह, जीवन सिंह ने गुंजी से फोन पर बताया कि यदि व्यापारियों को किसी प्रकार की कठिनाई हुई तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। भारत-तिब्बत व्यापार की प्रक्रिया देख रहे तहसील कार्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल ने बताया कि सभी व्यापारी भारत आ चुके हैं। अब कोई व्यापारी तकलाकोट में नहीं है।
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उन्होंने कहा कि इस बार भारत से गुड़, मिश्री, कॉफी, बिसाता के सामान का निर्यात हुआ और तकलाकोट से रेडीमेड कपड़े, कंबल, याक के पूंछ, कालीन आदि का आयात हुआ। उन्होंने कहा कि कस्टम विभाग के अधिकारी जल्दी गुंजी पहुंच जाएंगे।
आयात-निर्यात पर उतार-चढ़ाव हुआ
भारत तिब्बत व्यापार में लगातार उतार-चढ़ाव आता रहा है। पांच वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो व्यापार का आंकड़ा हर साल घटता-बढ़ता रहा है। वर्ष 2013 में 78 व्यापारियों और 117 सहायकों ने व्यापार में हिस्सा लिया और 8 करोड़ 15 लाख 330 रुपये का आयात और 1 करोड़ 29 लाख 93 हजार 817 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2014 में 89 व्यापारी और 184 सहायकों ने हिस्सा लिया और 2 करोड़ 48 लाख 75 हजार 57 रुपये का आयात किया। एक करोड़ 82 लाख 6 हजार 865 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2015 में 77 व्यापारी और 115 सहायकों व्यापार में हिस्सा लेकर 3 करोड़ 26 लाख 18 हजार 415 रुपये का आयात तथा 1 करोड़ 62 लाख 32 हजार 670 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2016 में 77 व्यापारी और 118 सहायकों ने 5 करोड़ 21 लाख 55 हजार 619 रुपये का आयात तथा 75 लाख 95 हजार 650 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2017 में 78 व्यापारियों, 117 सहायकों ने भाग लिया तथा 7 करोड़ 34 लाख 49 हजार 819 रुपये का आयात किया। 85 लाख 46 हजार 50 रुपये का निर्यात किया। भारत तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने कहा कि केंद्र सरकार के उपेक्षा के कारण भारतीय मंडी गुंजी का अपेक्षा अनुरूप विकास नहीं हो पाया, जिस कारण निर्यात कम होता जा रहा है।
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इधर, गुंजी में तैनात कस्टम अधिकारी योगेश गंभीर 29 अक्तूबर को ही गुंजी से धारचूला को आ गए हैं। गुंजी में कस्टम विभाग का कोई अधिकारी न होने से व्यापारियों को गुंजी से सामान धारचूला लाने में कठिनाई होगी। तिब्बत से लाए जाने वाले हर सामान की कस्टम विभाग जांच करता है और उस पर कस्टम शुल्क का निर्धारण करता है। गुंजी में कस्टम विभाग के दो कर्मचारी हैं, लेकिन बिना अधिकारी के वह सामान की जांच नहीं कर सकते।
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तिब्बत व्यापार में भाग लेकर मंगलवार को गुंजी पहुंचे व्यापारी जगदीश सिंह, दिनेश सिंह, जीवन सिंह ने गुंजी से फोन पर बताया कि यदि व्यापारियों को किसी प्रकार की कठिनाई हुई तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। भारत-तिब्बत व्यापार की प्रक्रिया देख रहे तहसील कार्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल ने बताया कि सभी व्यापारी भारत आ चुके हैं। अब कोई व्यापारी तकलाकोट में नहीं है।
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उन्होंने कहा कि इस बार भारत से गुड़, मिश्री, कॉफी, बिसाता के सामान का निर्यात हुआ और तकलाकोट से रेडीमेड कपड़े, कंबल, याक के पूंछ, कालीन आदि का आयात हुआ। उन्होंने कहा कि कस्टम विभाग के अधिकारी जल्दी गुंजी पहुंच जाएंगे।
आयात-निर्यात पर उतार-चढ़ाव हुआ
भारत तिब्बत व्यापार में लगातार उतार-चढ़ाव आता रहा है। पांच वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो व्यापार का आंकड़ा हर साल घटता-बढ़ता रहा है। वर्ष 2013 में 78 व्यापारियों और 117 सहायकों ने व्यापार में हिस्सा लिया और 8 करोड़ 15 लाख 330 रुपये का आयात और 1 करोड़ 29 लाख 93 हजार 817 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2014 में 89 व्यापारी और 184 सहायकों ने हिस्सा लिया और 2 करोड़ 48 लाख 75 हजार 57 रुपये का आयात किया। एक करोड़ 82 लाख 6 हजार 865 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2015 में 77 व्यापारी और 115 सहायकों व्यापार में हिस्सा लेकर 3 करोड़ 26 लाख 18 हजार 415 रुपये का आयात तथा 1 करोड़ 62 लाख 32 हजार 670 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2016 में 77 व्यापारी और 118 सहायकों ने 5 करोड़ 21 लाख 55 हजार 619 रुपये का आयात तथा 75 लाख 95 हजार 650 रुपये का निर्यात किया। वर्ष 2017 में 78 व्यापारियों, 117 सहायकों ने भाग लिया तथा 7 करोड़ 34 लाख 49 हजार 819 रुपये का आयात किया। 85 लाख 46 हजार 50 रुपये का निर्यात किया। भारत तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने कहा कि केंद्र सरकार के उपेक्षा के कारण भारतीय मंडी गुंजी का अपेक्षा अनुरूप विकास नहीं हो पाया, जिस कारण निर्यात कम होता जा रहा है।