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धारचूला ब्लाक प्रमुख की कुर्सी के लिए घेराबंदी शुरू
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:55 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला के कांग्रेसी ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 12 अक्तूबर को चर्चा होगी। उसी दिन कुंवर के भाग्य का फैसला हो जाएगा। इस समय ब्लॉक प्रमुख को पद से हटाने के लिए जबर्दस्त तरीके की घेरेबंदी चल रही है। खास बात यह है कि सितंबर 2014 में नेत्र सिंह कुंवर ने ब्लॉक प्रमुख पद पर जिस दावेदार को हराया था, वह भाजपा से जुड़े हैं, जबकि ज्येष्ठ उपप्रमुख भी भाजपा में सक्रिय हैं। ऐसे में यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है तो ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी भाजपा की झोली में चली जाएगी। भाजपा के बड़े नेता पिछले दरवाजे से इसी तरह के प्रयास में लगे हैं।
सितंबर 2014 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में क्षेत्र समिति के सभी 40 सदस्यों ने हिस्सा लिया। 21 वोट हासिल कर नेत्र सिंह कुंवर ब्लॉक प्रमुख बने और उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रुकम सिंह बिष्ट को 19 वोट मिले थे। इस बीच तीन वर्ष की अवधि में दो सदस्यों की मौत हो चुकी है। अब क्षेत्र समिति में सदस्यों की संख्या 38 है। अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले 26 सदस्यों में से एक सदस्य की प्रस्ताव पेश होने के बाद मौत हो गई। इस कारण गणित थोड़ा उलझ गया है।
ब्लॉक प्रमुख को पद से हटाने और अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए दो तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। यह बात अलग है कि आंकड़ा उलझने पर चुनाव आयोग अपनी राय देता है। वहीं, ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर का कहना है कि उनको 13 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है और कुर्सी को कोई खतरा नहीं है, जबकि दूसरी तरफ सदस्यों को एकजुट करने में लगे भाजपा के जिला महामंत्री महेंद्र बुदियाल का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा। उनके साथ 25 सदस्य हैं।
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उधर, जानकारों का कहना है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है तो कुछ समय तक ज्येष्ठ उपप्रमुख को कार्यवाहक की जिम्मेदारी मिल जाएगी और छह माह के भीतर ब्लॉक प्रमुख के लिए फिर से मतदान कराना होगा। फिलहाल धारचूला क्षेत्र पंचायत समिति में इस समय रोचक माहौल बन गया है। लोगों की 12 अक्तूबर को होने वाली चर्चा पर नजर है। भाजपा और कांग्रेस के नेता अपने सदस्यों को संभालने में लगे हैं। यदि किसी एक खेमे से एक भी सदस्य इधर-उधर हो गया तो पासा पलट भी सकता है।
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सितंबर 2014 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में क्षेत्र समिति के सभी 40 सदस्यों ने हिस्सा लिया। 21 वोट हासिल कर नेत्र सिंह कुंवर ब्लॉक प्रमुख बने और उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रुकम सिंह बिष्ट को 19 वोट मिले थे। इस बीच तीन वर्ष की अवधि में दो सदस्यों की मौत हो चुकी है। अब क्षेत्र समिति में सदस्यों की संख्या 38 है। अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले 26 सदस्यों में से एक सदस्य की प्रस्ताव पेश होने के बाद मौत हो गई। इस कारण गणित थोड़ा उलझ गया है।
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ब्लॉक प्रमुख को पद से हटाने और अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए दो तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। यह बात अलग है कि आंकड़ा उलझने पर चुनाव आयोग अपनी राय देता है। वहीं, ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर का कहना है कि उनको 13 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है और कुर्सी को कोई खतरा नहीं है, जबकि दूसरी तरफ सदस्यों को एकजुट करने में लगे भाजपा के जिला महामंत्री महेंद्र बुदियाल का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा। उनके साथ 25 सदस्य हैं।
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उधर, जानकारों का कहना है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है तो कुछ समय तक ज्येष्ठ उपप्रमुख को कार्यवाहक की जिम्मेदारी मिल जाएगी और छह माह के भीतर ब्लॉक प्रमुख के लिए फिर से मतदान कराना होगा। फिलहाल धारचूला क्षेत्र पंचायत समिति में इस समय रोचक माहौल बन गया है। लोगों की 12 अक्तूबर को होने वाली चर्चा पर नजर है। भाजपा और कांग्रेस के नेता अपने सदस्यों को संभालने में लगे हैं। यदि किसी एक खेमे से एक भी सदस्य इधर-उधर हो गया तो पासा पलट भी सकता है।