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सीमांत में औद्यानिकी से महकेगा 2200 हेक्टेयर क्षेत्र
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दिनेश अवस्थी
पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के तहत जिले का 2200 हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट, खुमानी, सेब आदि की पौध लगाई जाएंगी। इसके लिए 110 कलस्टर बनाए गए हैं। इन कलस्टरों के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही उनके उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण कराया जाएगा। इससे 11 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना में खंडों विण, मूनाकोट, कनालीछीना, डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग और गंगोलीहाट में 20-20 हेक्टेयर के 110 कलस्टर बनाए गए हैं। इस बार सर्दियों में कनालीछीना, धारचूला और बेड़ीनाग के 11 कलस्टरों के 220 हेक्टेयर भूमि में 22 हजार बीजू अखरोट के पौधे लगाए जाएंगे। कलस्टरों में 550 किसान शामिल हैं।
मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि अखरोट के पेड़ शनिवार तक विभाग में पहुंच जाएंगे। इसके अलावा 50 हेक्टेयर क्षेत्र में आड़ू, खुमानी, सेब के पौधों का रोपण किया जाएगा। बरसात के सीजन में घाटी वाले क्षेत्रों में आम, लीची फलों के पौध वितरित किए जाएंगे। फल पौध रोपण के साथ ही किसानों को सब्जियों के जैविक उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को जैविक खाद, उर्वरक आदि भी उपलब्ध कराया जाएगा। उद्यान विभाग की योजना इस योजना में शामिल किसानों के उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण की भी है।
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पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के तहत जिले का 2200 हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट, खुमानी, सेब आदि की पौध लगाई जाएंगी। इसके लिए 110 कलस्टर बनाए गए हैं। इन कलस्टरों के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही उनके उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण कराया जाएगा। इससे 11 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना में खंडों विण, मूनाकोट, कनालीछीना, डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग और गंगोलीहाट में 20-20 हेक्टेयर के 110 कलस्टर बनाए गए हैं। इस बार सर्दियों में कनालीछीना, धारचूला और बेड़ीनाग के 11 कलस्टरों के 220 हेक्टेयर भूमि में 22 हजार बीजू अखरोट के पौधे लगाए जाएंगे। कलस्टरों में 550 किसान शामिल हैं।
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मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि अखरोट के पेड़ शनिवार तक विभाग में पहुंच जाएंगे। इसके अलावा 50 हेक्टेयर क्षेत्र में आड़ू, खुमानी, सेब के पौधों का रोपण किया जाएगा। बरसात के सीजन में घाटी वाले क्षेत्रों में आम, लीची फलों के पौध वितरित किए जाएंगे। फल पौध रोपण के साथ ही किसानों को सब्जियों के जैविक उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को जैविक खाद, उर्वरक आदि भी उपलब्ध कराया जाएगा। उद्यान विभाग की योजना इस योजना में शामिल किसानों के उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण की भी है।
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