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पुल बहने से संकट में 7 गांवों की 3000 आबादी
ब्यूरो/अमर उजाला, कनालीछीना
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:46 PM IST
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कनालीछीना के काणाधार नाले में टूटा पुल
- फोटो : अमर उजाला
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30 जून और एक जुलाई की बारिश ने पिथौरागढ़ जिले के बस्तड़ी, नाचनी के कुमौलगौन में तबाही का वो मंजर दिखाया, जिसे दशकों तक लोग भूल नहीं पाएंगे। इस आपदा ने लोगों के सामने हर तरह की दिक्कतें खड़ी की हैं। एक जुलाई की बारिश में चर्मा क्षेत्र से लगे काणाधार में बना 33 मीटर लंबा आरसीसी का पुल बह गया था। करीब 3000 आबादी वाले 7 गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
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बच्चे, बूढ़ों को दो किमी दूरी तय कर चर्मा में बने झूलापुल से नदी पार जाना पड़ रहा है। काणाधार में तीन साल पहले भी पुल नहीं था। तब औलतड़ी के एक परिवार के तीन लोग बह गए थे। इस हादसे के बाद गधेरे में पुल बना था। एक जुलाई की बारिश पुल के एक हिस्से को बहा ले गई, जिससे काणाधार, मलान, ढठखोला, चमडुगंरी, द्वालीसेरा, नारंगी, औलतड़ी गांव के लोग गंभीर संकट में पड़ गए हैं। लोग उफनाते गधेरे को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं।
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काणाधार के प्रधान राजेंद्र पंत, पूर्व प्रधान तेज राम बरताते हैं कि तीन साल पहले हादसे के बाद पुल बना था। एक बार फिर लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। लोगों का आरोप है कि पुल बहने के बाद भी राजस्व विभाग मौके पर नहीं पहुंचा। गधेरे में आवाजाही के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। इन गांवों के लोगों के पास कनालीछीना, भागीचौरा आने-जाने के लिए एकमात्र यही पुल था। गांव के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इस स्थान से चर्मागाड़ का पुल दो किमी दूर है। लोगों को चर्मागाड़ पुल तक पैदल जाना पड़ रहा है। उधर, प्रभारी तहसीलदार गोपी राम का कहना है कि टीम ने क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया है। रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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