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कोरोना के कारण सीमांत जिले में फूलों की खेती को 30 लाख का नुकसान
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थल के करेला में स्थित पॉलिहाउस में फूलों की खेती करती महिलाएं।
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। कोरोना संक्रमण के बाद जिले में जारी लॉकडाउन के कारण फूलों की खेती पर लाखों की मार पड़ी है। कई किसानों को इस बार उनकी लागत तक नहीं मिल पाई। किसानों को मजबूरी में ही स्थानीय स्तर पर फूलों को भेजना पड़ा। ग्राम्य और सहकारिता के माध्यम से किसानों ने अपनी आजीविका में सुधार किया।
थल के करेला में किसानों ने वर्ष 2019 में फेडरेशन के माध्यम से एक लाख की पूंजी लगातार चार पॉलीहाउस से शुरुआत की। बाद में इसे बढ़ाकर 26 पॉलीहाउस तक कर दिया गया। इसमें करीब दस हजार लीलियम, गैंदा, गुलदाऊदी आदि फूलों की खेती की गई। काश्तकारों के फूलों की डिमांड दिल्ली से मिलने लगी, जिसके बाद इन्हें दस लाख का शुद्ध लाभ मिला। इस वर्ष करीब 25 लाख रुपये के विभिन्न प्रकार के फूल लगाए गए लेकिन कोरोना के कारण इन्हें इस वर्ष कुल मिलाकर 30 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। किसान मदनमोहन उपाध्याय ने बताया कि कोरोना के कारण शादी समारोह न होने और वाहन की आवाजाही पर रोक से उन्हें फूलों को स्थानीय स्तर पर ही सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। इससे उन्हें करीब 30 लाख का नुकसान हुआ।
लीलियम स्टिक के मिलते थे 20 से 40रुपये
पिथौरागढ़। किसान मदनमोहन उपाध्याय ने बताया कि लीलियम की ओरियंटल और एशियाटिक प्रजाति के 20 से 40 रुपये मिलते थे। ओरियंटल की डिमांड पर 40 रुपया का एक स्टिक का किसान को मिलता था। इस बार रजनीगंधा फूलों की खेती भी की। लेकिन कोरोना के कारण लागत के अनुरूप दाम मिलने बेहद मुश्किल हो गया है। इस बार विभिन्न फूलों की दस हजार से अधिक स्टिक औने पौने दाम में बेचनी पड़ी। साथ ही गैंदा और गुलदाऊदी का लागत दाम मिलने भी किसानों के लिए मुश्किल है। संवाद
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थल के करेला में किसानों ने वर्ष 2019 में फेडरेशन के माध्यम से एक लाख की पूंजी लगातार चार पॉलीहाउस से शुरुआत की। बाद में इसे बढ़ाकर 26 पॉलीहाउस तक कर दिया गया। इसमें करीब दस हजार लीलियम, गैंदा, गुलदाऊदी आदि फूलों की खेती की गई। काश्तकारों के फूलों की डिमांड दिल्ली से मिलने लगी, जिसके बाद इन्हें दस लाख का शुद्ध लाभ मिला। इस वर्ष करीब 25 लाख रुपये के विभिन्न प्रकार के फूल लगाए गए लेकिन कोरोना के कारण इन्हें इस वर्ष कुल मिलाकर 30 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। किसान मदनमोहन उपाध्याय ने बताया कि कोरोना के कारण शादी समारोह न होने और वाहन की आवाजाही पर रोक से उन्हें फूलों को स्थानीय स्तर पर ही सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। इससे उन्हें करीब 30 लाख का नुकसान हुआ।
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लीलियम स्टिक के मिलते थे 20 से 40रुपये
पिथौरागढ़। किसान मदनमोहन उपाध्याय ने बताया कि लीलियम की ओरियंटल और एशियाटिक प्रजाति के 20 से 40 रुपये मिलते थे। ओरियंटल की डिमांड पर 40 रुपया का एक स्टिक का किसान को मिलता था। इस बार रजनीगंधा फूलों की खेती भी की। लेकिन कोरोना के कारण लागत के अनुरूप दाम मिलने बेहद मुश्किल हो गया है। इस बार विभिन्न फूलों की दस हजार से अधिक स्टिक औने पौने दाम में बेचनी पड़ी। साथ ही गैंदा और गुलदाऊदी का लागत दाम मिलने भी किसानों के लिए मुश्किल है। संवाद
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