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बलतिर की पेयजल योजना ध्वस्त, सप्लाई बाधित
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:40 PM IST
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चंपावत कलक्ट्रेट में समर्थकों के साथ प्रदर्शन करते जिला पंचायत सदस्य भट्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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थल (पिथौरागढ़)। भारी बारिश के दौरान भेलियागाड़-बलतिर पेयजल योजना ध्वस्त हो गई है। जुलाई में भी पेयजल योजना को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा था, लेकिन उस समय योजना की मरम्मत नहीं की गई। गांव के लोगों ने किसी तरह योजना की खुद ही मरम्मत कर पानी को चला रखा था, लेकिन यह योजना अब पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
स्वैप योजना के तहत यह पेयजल योजना 2010 में बनकर तैयार हुई थी। करीब तीन किलोमीटर लंबी इस पेयजल योजना से जलैथ, बलतिर, थालगाड़ा, ढुंगखानी गांवों के करीब दो हजार लोगों को पानी मिल रहा था। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह भैंसोड़ा ने बताया कि पेयजल योजना ध्वस्त होने की जानकारी कई बार जल निगम और आपदा नियंत्रण कक्ष को दे दी गई है, लेकिन अब तक सुधार के कदम नहीं उठाए गए हैं। सरकारी विभागों के रवैये से लोगों में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि पेयजल योजना की मरम्मत न होने से लोगों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
लोग गंदे स्रोतों का पानी पीने को मजबूर हैं। इससे किसी भी समय गंभीर बीमारी फैल सकती है। इधर, जल निगम के अधिशासी अभियंता बीके कौशिक का कहना है कि स्वैप के तहत बनने वाली पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायत के अधीन कर दिया जाता है। गांव के लोगों को ही योजना की देखरेख करनी होती है। यदि योजना क्षतिग्रस्त होने के संबंध में राजस्व पुलिस की रिपोर्ट मिल जाए तो मरम्मत के लिए धन की व्यवस्था की जाएगी।
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स्वैप योजना के तहत यह पेयजल योजना 2010 में बनकर तैयार हुई थी। करीब तीन किलोमीटर लंबी इस पेयजल योजना से जलैथ, बलतिर, थालगाड़ा, ढुंगखानी गांवों के करीब दो हजार लोगों को पानी मिल रहा था। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह भैंसोड़ा ने बताया कि पेयजल योजना ध्वस्त होने की जानकारी कई बार जल निगम और आपदा नियंत्रण कक्ष को दे दी गई है, लेकिन अब तक सुधार के कदम नहीं उठाए गए हैं। सरकारी विभागों के रवैये से लोगों में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि पेयजल योजना की मरम्मत न होने से लोगों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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लोग गंदे स्रोतों का पानी पीने को मजबूर हैं। इससे किसी भी समय गंभीर बीमारी फैल सकती है। इधर, जल निगम के अधिशासी अभियंता बीके कौशिक का कहना है कि स्वैप के तहत बनने वाली पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायत के अधीन कर दिया जाता है। गांव के लोगों को ही योजना की देखरेख करनी होती है। यदि योजना क्षतिग्रस्त होने के संबंध में राजस्व पुलिस की रिपोर्ट मिल जाए तो मरम्मत के लिए धन की व्यवस्था की जाएगी।
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