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राज्य आंदोलनकारी के निधन पर शोक, मदकोट बाजार बंद
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:48 PM IST
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राज्य आंदोलनकारी के निधन पर शोक, मदकोट बाजार बंद
मदकोट/मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। राज्य आंदोलनकारी रणजीत विश्वकर्मा का बुधवार को मदकोट में गोरी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके निधन के शोक पर मदकोट के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। भारी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। उनका मंगलवार को हल्द्वानी के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
62 वर्षीय रणजीत अविवाहित थे। उन्होंने सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए कई बार आंदोलन किए थे। वर्ष 2001 में उन्होंने 14 दिन तक आमरण अनशन कर प्रशासन को हिलाकर रख दिया था। उनके अनशन के बाद ही सरकार ने मदकोट में बाइपास सड़क और सेराघाट में आपदा के समय बहे मोटर पुल का निर्माण किया था।
मूल रूप से गांधीनगर गांव निवासी रणजीत विश्वकर्मा को बेहद संवेदनशील नेता के रूप में जाना जाता था। स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त रणजीत ने बाद में उत्तराखंड क्रांति दल की सदस्यता ली। वह यूकेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। करीब तीन साल से बीमार चल रहे रणजीत विश्वकर्मा का हल्द्वानी में इलाज चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने उनको श्रद्धांजलि दी।
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व्यापारी के शोक में बंद रही दुकानें
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। मंगलवार को सरयू नदी में डूबे व्यापारी कमल सिंह (22) पुत्र नंदन सिंह के शोक में बुधवार को पोस्टआफिस लाइन के व्यापारियों ने दुकान बंद कर शोक जताया। कमल मंगलवार को शवयात्रा में सेरागड़ा गया था। जहां नहाते समय वह नदी में डूब गया, उसकी मौत हो गई थी।
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मदकोट/मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। राज्य आंदोलनकारी रणजीत विश्वकर्मा का बुधवार को मदकोट में गोरी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके निधन के शोक पर मदकोट के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। भारी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। उनका मंगलवार को हल्द्वानी के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
62 वर्षीय रणजीत अविवाहित थे। उन्होंने सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए कई बार आंदोलन किए थे। वर्ष 2001 में उन्होंने 14 दिन तक आमरण अनशन कर प्रशासन को हिलाकर रख दिया था। उनके अनशन के बाद ही सरकार ने मदकोट में बाइपास सड़क और सेराघाट में आपदा के समय बहे मोटर पुल का निर्माण किया था।
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मूल रूप से गांधीनगर गांव निवासी रणजीत विश्वकर्मा को बेहद संवेदनशील नेता के रूप में जाना जाता था। स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त रणजीत ने बाद में उत्तराखंड क्रांति दल की सदस्यता ली। वह यूकेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। करीब तीन साल से बीमार चल रहे रणजीत विश्वकर्मा का हल्द्वानी में इलाज चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने उनको श्रद्धांजलि दी।
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व्यापारी के शोक में बंद रही दुकानें
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। मंगलवार को सरयू नदी में डूबे व्यापारी कमल सिंह (22) पुत्र नंदन सिंह के शोक में बुधवार को पोस्टआफिस लाइन के व्यापारियों ने दुकान बंद कर शोक जताया। कमल मंगलवार को शवयात्रा में सेरागड़ा गया था। जहां नहाते समय वह नदी में डूब गया, उसकी मौत हो गई थी।