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इलाज में लापरवाही पर चिकित्सक समेत चार नपे
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:53 PM IST
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पिथौरागढ़। इलाज में लापरवाही पर जिला महिला अस्पताल के एक चिकित्सक समेत चार कार्मिक नप गए हैं। मजिस्ट्रेटी जांच में इन कार्मिकों को साफ तौर पर दोषी माना गया है। डीएम ने सभी कार्मिकों की सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए हैं।
महिला अस्पताल के प्रसव के दौरान इलाज में लापरवाही को लेकर चिकित्सक और स्टाफ के खिलाफ मजिस्ट्रेटी जांच बैठाई गई थी। डीएम ने एसडीएम एसके पांडेय को जांच सौंपी थी। मजिस्ट्रेटी जांच के दौरान चिकित्सक और स्टाफ पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद डीएम ने दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
आरोपियों में महिला चिकित्सक कर्णिका पंत, स्टाफ नर्स अंजलि सिंह, मीना गुप्ता और आया क्षमता शामिल हैं। डीएम ने बताया कि अस्पताल के सीएमएस को आरोपी स्टाफ को तत्काल प्रभाव से सेवा मुक्त करने के आदेश दिए हैं। आरोपी स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश भी दिए हैं।
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क्या था मामला
पिछले साल अक्तूबर में पिथौरागढ़ के सेरा निवासी ममता मेहता को प्रसव पीड़ा के बाद महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात और महिला की हालत बिगड़ गई थी। बाद में नवजात ने हल्द्वानी के एसटीएस में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल मेें चिकित्सक और स्टाफ की लापरवाही का आलम यह था कि बच्चे को पिथौरागढ़ में ही मृत घोषित कर दिया, जबकि नवजात की मौत एसटीएच में हुई। तब परिजनों ने चिकित्सक और स्टाफ पर प्रसूता से मारपीट और इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। इसे लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। बाद में पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय को शिकायत की थी। इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के साथ विभागीय जांच भी चल रही थी।
चिकित्सक पर रिपोर्ट दर्ज होगी
इस मामले में आरोपी चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज भी होगी। चिकित्सक पर लापरवाही के चलते नवजात की मौत का आरोप है। इस संबंध में डीएम ने सीएमएस को प्रकरण का विधिक परीक्षण कराने के आदेश भी दिए हैं। विधिक परीक्षण के बाद आरोपी चिकित्सक पर कानूनी शिकंजा कसेगा।
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महिला अस्पताल के प्रसव के दौरान इलाज में लापरवाही को लेकर चिकित्सक और स्टाफ के खिलाफ मजिस्ट्रेटी जांच बैठाई गई थी। डीएम ने एसडीएम एसके पांडेय को जांच सौंपी थी। मजिस्ट्रेटी जांच के दौरान चिकित्सक और स्टाफ पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद डीएम ने दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
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आरोपियों में महिला चिकित्सक कर्णिका पंत, स्टाफ नर्स अंजलि सिंह, मीना गुप्ता और आया क्षमता शामिल हैं। डीएम ने बताया कि अस्पताल के सीएमएस को आरोपी स्टाफ को तत्काल प्रभाव से सेवा मुक्त करने के आदेश दिए हैं। आरोपी स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश भी दिए हैं।
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क्या था मामला
पिछले साल अक्तूबर में पिथौरागढ़ के सेरा निवासी ममता मेहता को प्रसव पीड़ा के बाद महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात और महिला की हालत बिगड़ गई थी। बाद में नवजात ने हल्द्वानी के एसटीएस में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल मेें चिकित्सक और स्टाफ की लापरवाही का आलम यह था कि बच्चे को पिथौरागढ़ में ही मृत घोषित कर दिया, जबकि नवजात की मौत एसटीएच में हुई। तब परिजनों ने चिकित्सक और स्टाफ पर प्रसूता से मारपीट और इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। इसे लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। बाद में पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय को शिकायत की थी। इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के साथ विभागीय जांच भी चल रही थी।
चिकित्सक पर रिपोर्ट दर्ज होगी
इस मामले में आरोपी चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज भी होगी। चिकित्सक पर लापरवाही के चलते नवजात की मौत का आरोप है। इस संबंध में डीएम ने सीएमएस को प्रकरण का विधिक परीक्षण कराने के आदेश भी दिए हैं। विधिक परीक्षण के बाद आरोपी चिकित्सक पर कानूनी शिकंजा कसेगा।