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असम राइफल के वारंट अफसर की सैन्य सम्मान से अंत्येष्टि
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:46 PM IST
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थल (पिथौरागढ़)। असम राइफल के वारंट अफसर अर्जुन प्रसाद (53) का शुक्रवार को रामगंगा घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बुंगाछीना के पास तायल गांव निवासी वारंट अफसर इस समय नगालैंड के तीनसांग पोस्ट पर तैनात थे। शुक्रवार सुबह पहले उनका पार्थिव शरीर तायल गांव ले जाया गया। बाद में रामगंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। तीन कुमाऊं राइफल्स के सूबेदार भूपाल सिंह के नेतृत्व में आए जवानों ने पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी।
पार्थिव शरीर को यहां लेकर पहुंचे असम राइफल्स के सूबेदार सीएम कोठारी और राइफलमैन वीरेंद्र सिंह ने बताया कि छह दिसंबर को सुबह सात बजे परेड करने के बाद जैसे ही अर्जुन प्रसाद कमरे में पहुंचे तो उनको दिल का दौरा पड़ गया। उनको यूनिट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। पार्थिव शरीर को नगालैंड से दिल्ली तक विमान से लाया गया। वहां से सड़क से शुक्रवार सुबह पार्थिव शरीर यहां पहुंचाया गया। वारंट अफसर अर्जुन प्रसाद के घर पर पत्नी गीता देवी, बेटा राहुल कुमार और विजय कुमार हैं।
बड़ी बेटी प्रिया की तीन साल पहले शादी हो गई थी। अर्जुन प्रसाद के दोनों बेटों और छोटे भाई मोहन प्रसाद ने मुखाग्नि दी। गांव के लोगों ने बताया कि अर्जुन काफी मिलनसार स्वभाव के थे। वह जब भी छुट्टी पर घर आते थे तो सामाजिक कामों में हिस्सा लेते थे। उनके आकस्मिक निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है। गांव के कई लोग अंत्येष्टि के समय मौजूद रहे।
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पार्थिव शरीर को यहां लेकर पहुंचे असम राइफल्स के सूबेदार सीएम कोठारी और राइफलमैन वीरेंद्र सिंह ने बताया कि छह दिसंबर को सुबह सात बजे परेड करने के बाद जैसे ही अर्जुन प्रसाद कमरे में पहुंचे तो उनको दिल का दौरा पड़ गया। उनको यूनिट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। पार्थिव शरीर को नगालैंड से दिल्ली तक विमान से लाया गया। वहां से सड़क से शुक्रवार सुबह पार्थिव शरीर यहां पहुंचाया गया। वारंट अफसर अर्जुन प्रसाद के घर पर पत्नी गीता देवी, बेटा राहुल कुमार और विजय कुमार हैं।
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बड़ी बेटी प्रिया की तीन साल पहले शादी हो गई थी। अर्जुन प्रसाद के दोनों बेटों और छोटे भाई मोहन प्रसाद ने मुखाग्नि दी। गांव के लोगों ने बताया कि अर्जुन काफी मिलनसार स्वभाव के थे। वह जब भी छुट्टी पर घर आते थे तो सामाजिक कामों में हिस्सा लेते थे। उनके आकस्मिक निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है। गांव के कई लोग अंत्येष्टि के समय मौजूद रहे।
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