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उबड़-खाबड़ सड़कों से कैसे आएंगे पर्यटक
Updated Wed, 26 Sep 2018 11:12 PM IST
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पिथौरागढ़। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई दावे तो किए जाते हैं, लेकिन प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए उचित सड़कें तक नहीं हैं। जो सड़कें हैं, उनमें गड्ढों के कारण हर समय दुर्घटना का खतरा रहता है। ऐसे में उबड़-खाबड़ सड़कों पर पर्यटन कैसे बढ़ेगा, यह बड़ा सवाल है।
पिथौरागढ़ जिला पर्यटन की दृष्टि से अग्रणी है। यहां स्थित नामिक ग्लेशियर, ओम पर्वत, नारायण आश्रम के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग के लिए भी आते हैं। पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद जिले की सड़कें खस्ताहाल हैं। जनपद को जोड़ने वाली प्रमुख टनकपुर-तवाघाट सड़क पर डेढ़ दशक से चौड़ीकरण का काम चल रहा है।
सड़क पर गड्ढों, जगह-जगह पर जमा मलबे और धूल के कारण सफर कष्टदायी हो जाता है। सड़कों की इस दयनीय हालत के कारण पर्यटक इन रूटों से दूरी बनाकर रखते हैं। थल से मुनस्यारी को जोड़ने वाली सड़क बरसात में अधिकतर समय बंद रहती है। इसके अलावा वर्ष 2013 की आपदा में ध्वस्त उच्च हिमालयी क्षेत्र को जोड़ने वाले ट्रैकिंग रूटों का अब तक सुधार नहीं हो पाया है। यदि ट्रैकिंग रूटों पर सुविधाएं बढ़ें तो साहसिक पर्यटन भी बढ़ेगा।
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साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है पिथौरागढ़
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिला साहसिक पर्यटन के नजरिये से पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां पर रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, पेरासोलिंग के लिए पर्याप्त मुफीद स्थल हैं। काली नदी में हर साल केएमवीएन की ओर से राफ्टिंग कराई जाती है। पिथौरागढ़ में पैराग्लाइडिंग और मुनस्यारी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिता दो वर्ष पहले हो चुकी हैं। यदि सरकार पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराए तो बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे।
हवाई सेवा और थरकोट झील से बढ़ेगा पर्यटन
पिथौरागढ़। जनपद के मुनस्यारी और धारचूला में प्रतिवर्ष भले ही हजारों की संख्या में देसी-विदेशी सैलानी आते हों, लेकिन जिला मुख्यालय पर्यटकों के लिए तरसता रहता है, लेकिन नैनी सैनी से हवाई सेवा शुरू होने और थरकोट झील के निर्माण के बाद यहां पर पर्यटकों की आमद बढ़ने की उम्मीद है। नैनीसैनी हवाई पट्टी से सात अक्तूबर से उड़ान शुरू हो जाएगी। शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद बहुप्रतीक्षित थरकोट झील के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
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पिथौरागढ़ जिला पर्यटन की दृष्टि से अग्रणी है। यहां स्थित नामिक ग्लेशियर, ओम पर्वत, नारायण आश्रम के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग के लिए भी आते हैं। पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद जिले की सड़कें खस्ताहाल हैं। जनपद को जोड़ने वाली प्रमुख टनकपुर-तवाघाट सड़क पर डेढ़ दशक से चौड़ीकरण का काम चल रहा है।
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सड़क पर गड्ढों, जगह-जगह पर जमा मलबे और धूल के कारण सफर कष्टदायी हो जाता है। सड़कों की इस दयनीय हालत के कारण पर्यटक इन रूटों से दूरी बनाकर रखते हैं। थल से मुनस्यारी को जोड़ने वाली सड़क बरसात में अधिकतर समय बंद रहती है। इसके अलावा वर्ष 2013 की आपदा में ध्वस्त उच्च हिमालयी क्षेत्र को जोड़ने वाले ट्रैकिंग रूटों का अब तक सुधार नहीं हो पाया है। यदि ट्रैकिंग रूटों पर सुविधाएं बढ़ें तो साहसिक पर्यटन भी बढ़ेगा।
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साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है पिथौरागढ़
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिला साहसिक पर्यटन के नजरिये से पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां पर रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, पेरासोलिंग के लिए पर्याप्त मुफीद स्थल हैं। काली नदी में हर साल केएमवीएन की ओर से राफ्टिंग कराई जाती है। पिथौरागढ़ में पैराग्लाइडिंग और मुनस्यारी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिता दो वर्ष पहले हो चुकी हैं। यदि सरकार पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराए तो बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे।
हवाई सेवा और थरकोट झील से बढ़ेगा पर्यटन
पिथौरागढ़। जनपद के मुनस्यारी और धारचूला में प्रतिवर्ष भले ही हजारों की संख्या में देसी-विदेशी सैलानी आते हों, लेकिन जिला मुख्यालय पर्यटकों के लिए तरसता रहता है, लेकिन नैनी सैनी से हवाई सेवा शुरू होने और थरकोट झील के निर्माण के बाद यहां पर पर्यटकों की आमद बढ़ने की उम्मीद है। नैनीसैनी हवाई पट्टी से सात अक्तूबर से उड़ान शुरू हो जाएगी। शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद बहुप्रतीक्षित थरकोट झील के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो रही है।