फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   भारत में संचार सेवा बेहाल, नेपाल में गुलजार

भारत में संचार सेवा बेहाल, नेपाल में गुलजार

Fri, 23 Mar 2018 11:16 PM IST
Updated Fri, 23 Mar 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
भारत में संचार सेवा बेहाल, नेपाल में गुलजार
झूलाघाट/धारचूला/पिथौरागढ़। संचार सेवा के मामले में नेपाल भले ही दुनिया में काफी पीछे हो पर उत्तराखंड सीमा पर उसका नेटवर्क भारत के मुकाबले काफी मजबूत है।
विज्ञापन


इसके चलते महाकाली नदी से सटे झूलाघाट, फलाटी, सलतड़, चमतोड़ी, हंसेश्वर, तीतरी, बगड़ीहाट, जोग्यूड़ा और जौलजीबी में लोग भारतीय संचार कंपनियों के साथ नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं। इन इलाकों में नेपाली संचार कंपनी स्काई, नमस्ते, एनसेल आदि कंपनियों के सिम धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भारतीय संचार सेवा की इस खामी के चलते नेपाली संचार कंपनियां चांदी काट रही हैं और भारी राजस्व नेपाल सरकार को जा रहा है।
विज्ञापन


सिग्नल जाते ही गैस सिलेंडर मिलना हो जाता है मुश्किल
महाकाली नदी के किनारे बसे आदर्श गांव गेठिगाड़ा में 80 परिवार रहते हैं, सभी के पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन सिग्नल नहीं आने से उन लोगों को जरूरी फोन करने के लिए पांच किमी दूर झूलाघाट आना पड़ता है। गैस भी फोन से बुक होती है। फोन पर सिग्नल नहीं होने से लोग गैस बुक कराने से वंचित हो जाते हैं। इलाके में गैस वाहन आने की जानकारी तक टैक्सी चालकों से मिलती है। पासबुक एंट्री के साथ कई चीजों में मोबाइल नंबर की अनिवार्यता के कारण लोग परेशान हैं। पहले तक इन क्षेत्रों में डब्ल्यूएलएल की सेवा का फायदा मिल रहा था, दो साल पहले बीएसएनएल के टावर लगाने की बात कहकर इस सेवा को भी बंद कर दिया गया। सीमांत के लोग कहते हैं कि सरकार यदि सुविधा नहीं दे सकती है तो उनके नेपाली नंबरों को ही बैंक और गैस जैसी जरूरी सुविधाओं के साथ जोड़ दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


4500 नेपाली सिम सीमा पर हो रहे इस्तेमाल
धारचूला तहसील के जौलजीबी, बलुवाकोट, कालिका, धारचूला, तवाघाट, गुंजी, गर्ब्यांग जैसे चीन और नेपाल से सटे इलाके संचार के लिए तरस रहे हैं। एक जानकारी के मुताबिक झूलाघाट क्षेत्र के नेपाल सीमा से लगे 1100 परिवारों के 4500 लोग नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं। धारचूला में पहले बीएसएनएल का एक टावर हुआ करता था। संचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यापारियों और आम जनता ने लड़ाई लड़ी। तीन साल पहले बीएसएनएल के दो टावर और मंजूर हुए। उसके बाद दो निजी कंपनियों के टावर भी धारचूला में लग चुके हैं, लेकिन धारचूला की मोबाइल सेवा पुख्ता नहीं हो पाई है।


पंचेश्वर बांध के कारण विकास पर ध्यान नहीं दिया
झूलाघाट। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि महाकाली नदी घाटी पर बसे गांव राजनीति की भेंट चढ़ गए हैं। केंद्र में चाहे कांग्रेस की सरकार रही या भाजपा की किसी ने भी सीमांत का विकास नहीं किया। इसके पीछे पंचेश्वर बांध ही मुख्य कारण रहा है। सरकार चाहती है कि सुविधा विहीन इलाके से पलायन हो और पंचेश्वर जैसे विशाल बांध बनने का रास्ता साफ हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed