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इस बार रंगों का बाजार फीका
Updated Tue, 27 Feb 2018 10:49 PM IST
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पिथौरागढ़। चीन निर्मित उत्पादों से बढ़ती दूरी और केमिकल रंगों की जागरूकता के चलते इस बार होली का बाजार फीका नजर आ रहा है। मुख्यालय में पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार पिचकारी, रंग के दुकानों की संख्या घटकर एक चौथाई रह गई है। बाजार मेें ग्राहकों की आमद भी पिछले सालों की तुलना में काफी कम है। इससे बाजार क्षेत्र के दुकानदारों में निराशा है।
पिथौरागढ़ में गांधी चौक, सिमलगैर, पुरानी बाजार में अस्थायी तौर पर होली उत्पादों की दुकानें लगती हैं। इस बार बाजार क्षेत्र मेें गिनीचुनी दुकानें ही लगी हैं, जबकि पिछले साल बाजार क्षेत्र में होली के उत्पादों से जुड़ी तीन दर्जन अस्थायी दुकानें लगती थी। गांधी चौक में पिचकारी, रंग आदि बेचने वाले दुकानदार मोहम्मद रईस का कहना है कि इस बार बाजार में कम दुकानें लगी हैं। ग्राहक भी कम आ रहे हैं।
सिमलगैर के अस्थायी दुकानदार संजय का कहना है कि इस बार पिचकारी, रंग आदि की ब्रिकी कम है। दुकानदार में चीन निर्मित उत्पादों से दूरी और केमिकल रंगों के प्रति आई जागरूकता को कम ब्रिकी से जोड़कर देख रहे हैं।
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केमिकल विहीन रंगों में बढ़ी दिलचस्पी
बाजार में आरारोट और प्राकृतिक रंगों की ब्रिकी ज्यादा हो रही है। बाजार में केमिकल विहीन रंग 200 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध है। हालांकि दाम ज्यादा होने की वजह से हर्बल रंगों की ब्रिकी न के बराबर है। रंगों के थोक कारोबारी विशाल माहेश्वरी का कहना है कि इस बार ग्राहक प्राकृतिक रंग के प्रति ज्यादा जागरूकता दिखा रहे हैं।
300 रुपये की रेंज में होली के कपड़े
बाजार में होली के कपड़े सस्ती रेंज में उपलब्ध हैं। बच्चों के कुर्ता-पायजामा का सेट 100 से 250 रुपये में है। पुरुषों के कुर्ता-पायजामा के सेट 200 से 300, जबकि महिलाओं की कुर्ती एवं रंगीन साड़ियां 100 से 300 रुपये के बीच हैं। दुकानदार ललित बोरा के अनुसार हर वर्ग को होली के सस्ते परिधान खूब भा रहे हैं।
रंगों के पटाखे आकर्षण का केंद्र
बाजार में रंगों के पटाखे यानी कलर स्मोक आकर्षण का केंद्र हैं। कलर स्मोक 150 से 300 रुपये की रेंज में उपलब्ध हैं। दुकानदार रईस का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में कलर स्मोक की ज्यादा ब्रिकी हो रही है। इसके साथ ही बाजार में तरह-तरह के मुखौटा और हेयर विग भी मौजूद हैं।
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पिथौरागढ़ में गांधी चौक, सिमलगैर, पुरानी बाजार में अस्थायी तौर पर होली उत्पादों की दुकानें लगती हैं। इस बार बाजार क्षेत्र मेें गिनीचुनी दुकानें ही लगी हैं, जबकि पिछले साल बाजार क्षेत्र में होली के उत्पादों से जुड़ी तीन दर्जन अस्थायी दुकानें लगती थी। गांधी चौक में पिचकारी, रंग आदि बेचने वाले दुकानदार मोहम्मद रईस का कहना है कि इस बार बाजार में कम दुकानें लगी हैं। ग्राहक भी कम आ रहे हैं।
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सिमलगैर के अस्थायी दुकानदार संजय का कहना है कि इस बार पिचकारी, रंग आदि की ब्रिकी कम है। दुकानदार में चीन निर्मित उत्पादों से दूरी और केमिकल रंगों के प्रति आई जागरूकता को कम ब्रिकी से जोड़कर देख रहे हैं।
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केमिकल विहीन रंगों में बढ़ी दिलचस्पी
बाजार में आरारोट और प्राकृतिक रंगों की ब्रिकी ज्यादा हो रही है। बाजार में केमिकल विहीन रंग 200 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध है। हालांकि दाम ज्यादा होने की वजह से हर्बल रंगों की ब्रिकी न के बराबर है। रंगों के थोक कारोबारी विशाल माहेश्वरी का कहना है कि इस बार ग्राहक प्राकृतिक रंग के प्रति ज्यादा जागरूकता दिखा रहे हैं।
300 रुपये की रेंज में होली के कपड़े
बाजार में होली के कपड़े सस्ती रेंज में उपलब्ध हैं। बच्चों के कुर्ता-पायजामा का सेट 100 से 250 रुपये में है। पुरुषों के कुर्ता-पायजामा के सेट 200 से 300, जबकि महिलाओं की कुर्ती एवं रंगीन साड़ियां 100 से 300 रुपये के बीच हैं। दुकानदार ललित बोरा के अनुसार हर वर्ग को होली के सस्ते परिधान खूब भा रहे हैं।
रंगों के पटाखे आकर्षण का केंद्र
बाजार में रंगों के पटाखे यानी कलर स्मोक आकर्षण का केंद्र हैं। कलर स्मोक 150 से 300 रुपये की रेंज में उपलब्ध हैं। दुकानदार रईस का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में कलर स्मोक की ज्यादा ब्रिकी हो रही है। इसके साथ ही बाजार में तरह-तरह के मुखौटा और हेयर विग भी मौजूद हैं।