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पूर्व फौजी ने शुरू किया विद्यालय भवन का निर्माण
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:35 PM IST
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पूर्व सैनिक ने स्कूल भवन का निर्माण कराया
- फोटो : अमर उजाला
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मदकोट (पिथौरागढ़)। शासन के उपेक्षित रवैये से व्यथित होकर जोशा गांव निवासी पूर्व फौजी ने खंडहर बन चुके गांव के स्कूल के भवन की मरम्मत कार्य खुद शुरू कर दिया है। विभाग से अनुमति लेकर पिछले 18 दिन से भवन के मरम्मत कार्य में जुटे पूर्व सैनिक ने इस कार्य में आने वाले पांच लाख रुपये के खर्चे का वहन खुद करने का फैसला लिया है।
मुनस्यारी ब्लॉक के जोशा गांव निवासी कै. शेर सिंह कोरंगा (से.नि.) दिसंबर 2010 को जब 19 राजपूत रेजीमेंट में 28 वर्ष तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होकर घर आए तो अपने गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जोशा के भवन की दशा देखकर काफी व्यथित हो उठे। 1975 में उन्होंने इसी विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा ली थी। इसका भवन 1995 में खंडहर में तब्दील हो गया था। भवन की मरम्मत के लिए कैप्टन कोरंगा ने पहले कई बार अधिकारियों से संपर्क किया। लेकिन उन्हें कहीं से कोई सहयोग नहीं मिल पाया। इस पर उन्होंने मुनस्यारी के खंड शिक्षा अधिकारी भानुप्रताप सिंह के सामने यह प्रस्ताव रख दिया कि इस भवन की मरम्मत वह खुद करेंगे तो विभाग को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। खंड शिक्षा अधिकारी ने भवन की मरम्मत करने स्वीकृति दे दी तो उन्होंने पहले गांव के लोगों की बैठक बुलाई। इसके बाद विगत 11 जनवरी से इस भवन की मरम्मत का काम खुद ही शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि भवन की मरम्मत में कम से कम पांच लाख रुपये का खर्च आएगा। इसका वहन वह खुद करेंगे। भवन को 22 फुट चौड़ा और इतना ही लंबा बनाया जाएगा। उसमें प्रधानाध्यापक कक्ष के अलावा पांच कक्षाओं के लिए कमरे तैयार किए जाएंगे। अब तक भवन का काफी काम हो गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन खंडहर हो जाने के कारण पांचों कक्षाओं और आंगनबाड़ी केंद्र के सभी 27 बच्चों को एक साथ बिठाना पड़ता है। इससे पढ़ाई में व्यवधान आ रहा है। इसका असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
शासन के रवैये से व्यथित होकर खुद मरम्मत कार्य में जुटे कै .कोरंगा
1995 में खंडहर में तब्दील हो गया था जोशा स्कूल का भवन
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मुनस्यारी ब्लॉक के जोशा गांव निवासी कै. शेर सिंह कोरंगा (से.नि.) दिसंबर 2010 को जब 19 राजपूत रेजीमेंट में 28 वर्ष तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होकर घर आए तो अपने गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जोशा के भवन की दशा देखकर काफी व्यथित हो उठे। 1975 में उन्होंने इसी विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा ली थी। इसका भवन 1995 में खंडहर में तब्दील हो गया था। भवन की मरम्मत के लिए कैप्टन कोरंगा ने पहले कई बार अधिकारियों से संपर्क किया। लेकिन उन्हें कहीं से कोई सहयोग नहीं मिल पाया। इस पर उन्होंने मुनस्यारी के खंड शिक्षा अधिकारी भानुप्रताप सिंह के सामने यह प्रस्ताव रख दिया कि इस भवन की मरम्मत वह खुद करेंगे तो विभाग को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। खंड शिक्षा अधिकारी ने भवन की मरम्मत करने स्वीकृति दे दी तो उन्होंने पहले गांव के लोगों की बैठक बुलाई। इसके बाद विगत 11 जनवरी से इस भवन की मरम्मत का काम खुद ही शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि भवन की मरम्मत में कम से कम पांच लाख रुपये का खर्च आएगा। इसका वहन वह खुद करेंगे। भवन को 22 फुट चौड़ा और इतना ही लंबा बनाया जाएगा। उसमें प्रधानाध्यापक कक्ष के अलावा पांच कक्षाओं के लिए कमरे तैयार किए जाएंगे। अब तक भवन का काफी काम हो गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन खंडहर हो जाने के कारण पांचों कक्षाओं और आंगनबाड़ी केंद्र के सभी 27 बच्चों को एक साथ बिठाना पड़ता है। इससे पढ़ाई में व्यवधान आ रहा है। इसका असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
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शासन के रवैये से व्यथित होकर खुद मरम्मत कार्य में जुटे कै .कोरंगा
1995 में खंडहर में तब्दील हो गया था जोशा स्कूल का भवन