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एक साल से नहीं हुआ है मनरेगा का भुगतान
Updated Sat, 22 Jul 2017 10:43 PM IST
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। मजदूरी का भुगतान न होने से कनालीछीना विकासखंड के मनरेगा के 18,900 मजदूर दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो गए हैं। मनरेगा में काम करने वाले राजमिस्त्री और सामान की आपूर्ति करने वाले दुकानदार भी परेशान हैं।
मनरेगा के मजदूरों, राजमिस्त्रियों और मनरेगा के काम में सामान की आपूर्ति करने वाले दुकानदारों को वर्ष 2016 से भुगतान नहीं है। मजदूरी का भुगतान न होने से मजदूर बेहद परेशान हैं। मनरेगा में काम करने वाले प्रेम राम, सुरेंद्र राम, भगवान राम, दलीप सिंह, गंगा सिंह, जमुना देवी, पार्वती देवी, सावित्री देवी और शोबन सिंह ने बताया कि परिवार चलाने में मदद मिलने की उम्मीद से मनरेगा में मजदूरी की थी। मजदूरी का भुगतान न होने से वह लोग बेहद परेशान हैं। राशन की दुकानों में उनका इतना उधार हो गया है कि दुकानदारों ने अब उन्हें उधार देना बंद कर दिया है। इन लोगों ने मनरेगा की मजदूरी का तत्काल भुगतान करने की मांग की है।
इधर, बीडीओ गंगा सिंह बिष्ट ने मनरेगा का भुगतान न होने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 का 18.90 लाख रुपये मजदूरों का, 3.41 लाख रुपये राजमिस्त्री का और 13.61 लाख रुपये सामग्री का भुगतान होना है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2017-18 में 22.93 लाख मजदूरी, 2.40 लाख राजमिस्त्री और 30 लाख सामग्री का भुगतान होना है। मनरेगा के बजट के लिए लगातार मांग की जा रही है। जैसे ही रकम प्राप्त होगी, भुगतान कर दिया जाएगा। ब्यूरो
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मनरेगा के मजदूरों, राजमिस्त्रियों और मनरेगा के काम में सामान की आपूर्ति करने वाले दुकानदारों को वर्ष 2016 से भुगतान नहीं है। मजदूरी का भुगतान न होने से मजदूर बेहद परेशान हैं। मनरेगा में काम करने वाले प्रेम राम, सुरेंद्र राम, भगवान राम, दलीप सिंह, गंगा सिंह, जमुना देवी, पार्वती देवी, सावित्री देवी और शोबन सिंह ने बताया कि परिवार चलाने में मदद मिलने की उम्मीद से मनरेगा में मजदूरी की थी। मजदूरी का भुगतान न होने से वह लोग बेहद परेशान हैं। राशन की दुकानों में उनका इतना उधार हो गया है कि दुकानदारों ने अब उन्हें उधार देना बंद कर दिया है। इन लोगों ने मनरेगा की मजदूरी का तत्काल भुगतान करने की मांग की है।
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इधर, बीडीओ गंगा सिंह बिष्ट ने मनरेगा का भुगतान न होने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 का 18.90 लाख रुपये मजदूरों का, 3.41 लाख रुपये राजमिस्त्री का और 13.61 लाख रुपये सामग्री का भुगतान होना है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2017-18 में 22.93 लाख मजदूरी, 2.40 लाख राजमिस्त्री और 30 लाख सामग्री का भुगतान होना है। मनरेगा के बजट के लिए लगातार मांग की जा रही है। जैसे ही रकम प्राप्त होगी, भुगतान कर दिया जाएगा। ब्यूरो
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