{"_id":"5c9ba997bdec2213f22d27a3","slug":"171553705367-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फ्लैश बैक:एक ही वाहन में जाते थे प्रत्याशी, प्रचारक, निर्वाचन कर्मी,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फ्लैश बैक:एक ही वाहन में जाते थे प्रत्याशी, प्रचारक, निर्वाचन कर्मी,
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। कभी वह समय भी था जब प्रत्याशी, प्रचार करने वाले, निर्वाचन कर्मी आदि एक ही वाहन का उपयोग करने थे। लोग सुरक्षा ड्यूटी में लगे पीआरडी जवानों को भी नमस्कार करते थे और प्रचार अभियानों का संचालन पोस्टकार्ड के जरिए होता था।
1952 के पहले आम चुनाव से लेकर अब तक के हर चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे कल्याण सिंह रावल (89) के मुताबिक प्रत्याशी, प्रचार करने वाले, पोलिंग पार्टी के लोग केमू की बस में एक साथ मतदेय स्थल के लिए जाते थे। पोलिंग स्टेशनों पर नाममात्र की सुरक्षा व्यवस्था होती थी। शांत माहौल में मतदान होता था। राजनीतिक दलों के एजेंटों का भी व्यवहार शालीन रहता था। लोग इतने सीधे और सरल होते थे कि पोलिंग पार्टी के साथ आए पीआरडी के जवानों तक को नमस्कार करते थे। मतदान के बाद बैलेट बॉक्स बगैर किसी सुरक्षा व्यवस्था के मुख्यालय तक लाए जाते थे।
उस दौर में चुनाव प्रचार का माध्यम पोस्टकार्ड हुआ करता था। वह भी प्रत्याशी इलाके के प्रमुख लोगों को ही भेजते थे। यही प्रमुख लोग चुनाव अभियान का संचालन करते थे। जो फैसला इलाके के प्रमुख लोग करते थे, उस पर आम लोग अमल करते थे। 70 के दशक के बाद चुनाव का तौर तरीका बदल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
1952 के पहले आम चुनाव से लेकर अब तक के हर चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे कल्याण सिंह रावल (89) के मुताबिक प्रत्याशी, प्रचार करने वाले, पोलिंग पार्टी के लोग केमू की बस में एक साथ मतदेय स्थल के लिए जाते थे। पोलिंग स्टेशनों पर नाममात्र की सुरक्षा व्यवस्था होती थी। शांत माहौल में मतदान होता था। राजनीतिक दलों के एजेंटों का भी व्यवहार शालीन रहता था। लोग इतने सीधे और सरल होते थे कि पोलिंग पार्टी के साथ आए पीआरडी के जवानों तक को नमस्कार करते थे। मतदान के बाद बैलेट बॉक्स बगैर किसी सुरक्षा व्यवस्था के मुख्यालय तक लाए जाते थे।
विज्ञापन
उस दौर में चुनाव प्रचार का माध्यम पोस्टकार्ड हुआ करता था। वह भी प्रत्याशी इलाके के प्रमुख लोगों को ही भेजते थे। यही प्रमुख लोग चुनाव अभियान का संचालन करते थे। जो फैसला इलाके के प्रमुख लोग करते थे, उस पर आम लोग अमल करते थे। 70 के दशक के बाद चुनाव का तौर तरीका बदल गया।
विज्ञापन