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कीड़ाजड़ी के अध्ययन को नाग्निधुरा गए थे शोधार्थी
Updated Mon, 06 Aug 2018 10:57 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्र में रास्ता भटकने वाले जम्मू-कश्मीर (डोडा) निवासी प्रदीप कुमार और उनके सहयोगी धारचूला (रांथी, उत्तराखंड) निवासी राजेश सिंह बोरा कीड़ा जड़ी पर शोध के लिए निकले थे। ये दोनों रविवार को दोपहर बाद पंचाचुली के बेस कैं प में ग्रामीणों के खोजी दल को मिले थे। सोमवार को ये लोग कुल्थम गांव पहुंचे और मंगलवार को मुनस्यारी आएंगे।
अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में प्रदीप शर्मा ने बताया कि वो अपने साथी के साथ 30 जुलाई को रालम गए थे। जहां से एक अगस्त को दोनों लोग कुल्थम गांव पहुंचे। वहां से स्थानीय निवासी धन सिंह को साथ लेकर तीन अगस्त को नाग्निधुरा पहुंचे और वहां पहुंचकर टेंट लगाया। चार अगस्त को जीपीएस से मैप बनाने के लिए एक-दो घंटे में आने की बात कहते हुए दोनों आगे निकल गए। बादल ज्यादा होने के कारण जीपीएस ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद वे भटक गए और चट्टान की ओट में दो रात गुजारी। धन सिंह ने ही इन दोनों के लौटकर न आने की सूचना अन्य लोगों को दी।
उन्होंने दुर्फी नामक पौधे की कलियों को तोड़कर खाया। टंटरी की चौड़ी पत्तियों को तोड़कर छाते की धार से पानी इकट्ठा कर पिया। इस बीच ढिमढिमियां गांव की प्रधान कमला सुयाल और कुल्थम गांव के तेज सिंह दोसात, मनोज नेगी, दान सिंह पाना, राजेंद्र बिष्ट और महेंद्र बगरी उनको खोजते हुए पंचाचूली के निचले बेस कैंप पहुंचे। रविवार सुबह लगभग 11 बजे के आसपास इनकी ग्रामीणों से मुलाकात हुई। रविवार शाम वे नाग्निधुरा पहुंचे। आज सुबह वह लोग कुल्थम गांव पहुंचे। मंगलवार को वह लोग मुनस्यारी आएंगे।
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पीएचडी स्कॉलर प्रदीप शर्मा ने बताया कि यारसा गंबू मोथ से मिलती हैं। यह रात में दिखाई देता है। वो उसी के अध्ययन के लिए यहां आए हुए है।
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अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में प्रदीप शर्मा ने बताया कि वो अपने साथी के साथ 30 जुलाई को रालम गए थे। जहां से एक अगस्त को दोनों लोग कुल्थम गांव पहुंचे। वहां से स्थानीय निवासी धन सिंह को साथ लेकर तीन अगस्त को नाग्निधुरा पहुंचे और वहां पहुंचकर टेंट लगाया। चार अगस्त को जीपीएस से मैप बनाने के लिए एक-दो घंटे में आने की बात कहते हुए दोनों आगे निकल गए। बादल ज्यादा होने के कारण जीपीएस ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद वे भटक गए और चट्टान की ओट में दो रात गुजारी। धन सिंह ने ही इन दोनों के लौटकर न आने की सूचना अन्य लोगों को दी।
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उन्होंने दुर्फी नामक पौधे की कलियों को तोड़कर खाया। टंटरी की चौड़ी पत्तियों को तोड़कर छाते की धार से पानी इकट्ठा कर पिया। इस बीच ढिमढिमियां गांव की प्रधान कमला सुयाल और कुल्थम गांव के तेज सिंह दोसात, मनोज नेगी, दान सिंह पाना, राजेंद्र बिष्ट और महेंद्र बगरी उनको खोजते हुए पंचाचूली के निचले बेस कैंप पहुंचे। रविवार सुबह लगभग 11 बजे के आसपास इनकी ग्रामीणों से मुलाकात हुई। रविवार शाम वे नाग्निधुरा पहुंचे। आज सुबह वह लोग कुल्थम गांव पहुंचे। मंगलवार को वह लोग मुनस्यारी आएंगे।
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पीएचडी स्कॉलर प्रदीप शर्मा ने बताया कि यारसा गंबू मोथ से मिलती हैं। यह रात में दिखाई देता है। वो उसी के अध्ययन के लिए यहां आए हुए है।