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ढाई लाख महिलाओं पर महज 8 चिकित्सक
Updated Wed, 07 Mar 2018 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले की आधी से ज्यादा आबादी का स्वास्थ्य भगवान भरोसे चल रहा है। यहां ढाई लाख से अधिक महिला आबादी के इलाज की जिम्मेदारी महज आठ महिला डॉक्टरों के हवाले हैं।
जिले में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष 239306 तो महिलाओं की संख्या 244133 है। वर्तमान में महिलाओं की आबादी ढाई लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके इतर सरकारी अस्पतालों में न के बराबर महिला डॉक्टर हैं। जिले के 20 सरकारी अस्पतालों में से 14 महिला डॉक्टर विहीन हैं। इन अस्पतालों में महिला डॉक्टरों के 18 पद खाली हैं।
जिला महिला चिकित्सालय के अलावा महज चार स्वास्थ्य केंद्रों पर ही एक-एक महिला डॉक्टर हैं। इनकी संख्या महज आठ है। ऐसे में बड़ी महिला आबादी के स्वास्थ्य का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों की यह स्थिति सरकार के महिला सशक्तीकरण के दावों की कलई उतारने को काफी है।
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जिला महिला अस्पताल की जिम्मेदारी चार महिला डॉक्टरों पर
जिला महिला अस्पताल महज चार डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। यहां महिला डॉक्टर के तीन पद रिक्त हैं। इसके बावजूद कि जिले भर की आधी आबादी प्रसव एवं अन्य महिला रोगों के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। रोजाना 300 से अधिक महिलाएं अस्पताल में आती हैं।
इन सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं महिला चिकित्सक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गंगोलीहाट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गणाईगंगोली
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़ालू
अतिरिक्त प्रा. स्वा. केंद, झूलाघाट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मूनाकोट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कनालीछीना
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मुवानी
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, भागीचौरा
संयुक्त चिकित्सालय, धारचूला
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सोसा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मुनस्यारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, डीडीहाट
महिला चिकित्सालय, थल
महिला चिकित्सालय, बेड़ीनाग
अस्पतालों में स्वीकृत महिला डॉक्टरों के अधिकतर पद रिक्त चल रहे हैं। मुख्यालय को डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए लिखा गया है। -डॉ ऊषा गुंजियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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जिले में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुष 239306 तो महिलाओं की संख्या 244133 है। वर्तमान में महिलाओं की आबादी ढाई लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके इतर सरकारी अस्पतालों में न के बराबर महिला डॉक्टर हैं। जिले के 20 सरकारी अस्पतालों में से 14 महिला डॉक्टर विहीन हैं। इन अस्पतालों में महिला डॉक्टरों के 18 पद खाली हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय के अलावा महज चार स्वास्थ्य केंद्रों पर ही एक-एक महिला डॉक्टर हैं। इनकी संख्या महज आठ है। ऐसे में बड़ी महिला आबादी के स्वास्थ्य का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों की यह स्थिति सरकार के महिला सशक्तीकरण के दावों की कलई उतारने को काफी है।
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जिला महिला अस्पताल की जिम्मेदारी चार महिला डॉक्टरों पर
जिला महिला अस्पताल महज चार डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। यहां महिला डॉक्टर के तीन पद रिक्त हैं। इसके बावजूद कि जिले भर की आधी आबादी प्रसव एवं अन्य महिला रोगों के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। रोजाना 300 से अधिक महिलाएं अस्पताल में आती हैं।
इन सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं महिला चिकित्सक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गंगोलीहाट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गणाईगंगोली
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़ालू
अतिरिक्त प्रा. स्वा. केंद, झूलाघाट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मूनाकोट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कनालीछीना
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मुवानी
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, भागीचौरा
संयुक्त चिकित्सालय, धारचूला
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सोसा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मुनस्यारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, डीडीहाट
महिला चिकित्सालय, थल
महिला चिकित्सालय, बेड़ीनाग
अस्पतालों में स्वीकृत महिला डॉक्टरों के अधिकतर पद रिक्त चल रहे हैं। मुख्यालय को डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए लिखा गया है। -डॉ ऊषा गुंजियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़