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मल्ला दुम्मर गांव में हरि प्रदर्शनी शुरू
Updated Mon, 06 Nov 2017 11:23 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। यहां मल्ला दुम्मर गांव में श्री हरि प्रदर्शनी शुरू हो गई है। स्वाधीनता सेनानी हरि सिंह जंगपांगी की याद में हर साल यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। पूर्व वन संरक्षक डा. भगत सिंह बुर्फाल ने हरि प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि स्वाधीनता सेनानी के सम्मान में आयोजित किया जाने वाला यह कार्यक्रम सराहनीय है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से सेनानियों के जीवन के बारे में जानकारी नई पीढ़ी को मिल जाती है।
डा. बुर्फाल ने सेनानी के चित्र पर माल्यार्पण किया और स्टालों का निरीक्षण किया। विभिन्न सरकारी विभागों के स्टाल प्रदर्शनी में लगाए गए हैं। बाद में मल्ला जोहार विकास समिति की बैठक हुई। बैठक में मल्ला जोहार के गांवों की समस्याओं पर चर्चा हुई। मल्ला जोहार के कई गांवों से लोग मौसमी प्रवास पर छह माह के लिए घाटी वाले इलाकों में जाते हैं। कहा गया कि गांवों के विकास के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है।
यदि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में सुविधाओं का विस्तार हो जाए तो मौसमी प्रवास पर जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। सबसे पहले इन गांवों तक सड़क और संचार संपर्क बनाया जाए। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी विवेक प्रकाश, हरि स्मारक समिति के अध्यक्ष ललित जंगपांगी, सचिव गंगा सिंह जंगपांगी, विजय जंगपांगी, श्रीराम धर्मशक्तू, लोकबहादुर जंगपांगी, अमर राम, डॉ. जनार्दन पांगती, शंकर धर्मशक्तू, हयात रावत, लक्ष्मण धर्मशक्तू, गजेंद्र पांगती आदि मौजूद थे।
डा. बुर्फाल ने सेनानी के चित्र पर माल्यार्पण किया और स्टालों का निरीक्षण किया। विभिन्न सरकारी विभागों के स्टाल प्रदर्शनी में लगाए गए हैं। बाद में मल्ला जोहार विकास समिति की बैठक हुई। बैठक में मल्ला जोहार के गांवों की समस्याओं पर चर्चा हुई। मल्ला जोहार के कई गांवों से लोग मौसमी प्रवास पर छह माह के लिए घाटी वाले इलाकों में जाते हैं। कहा गया कि गांवों के विकास के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है।
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यदि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में सुविधाओं का विस्तार हो जाए तो मौसमी प्रवास पर जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। सबसे पहले इन गांवों तक सड़क और संचार संपर्क बनाया जाए। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी विवेक प्रकाश, हरि स्मारक समिति के अध्यक्ष ललित जंगपांगी, सचिव गंगा सिंह जंगपांगी, विजय जंगपांगी, श्रीराम धर्मशक्तू, लोकबहादुर जंगपांगी, अमर राम, डॉ. जनार्दन पांगती, शंकर धर्मशक्तू, हयात रावत, लक्ष्मण धर्मशक्तू, गजेंद्र पांगती आदि मौजूद थे।
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