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सरकार को किसानों की अनदेखी भारी पड़ेगी

Fri, 23 Jun 2017 10:44 PM IST
Updated Fri, 23 Jun 2017 10:44 PM IST
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सरकार को किसानों की अनदेखी भारी पड़ेगी
सरकार को किसानों की अनदेखी भारी पड़ेगी
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थल (पिथौरागढ़)। कर्ज लेकर फसल बोने वाले किसानों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए। वर्ना किसानों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ जाएगी। बेड़ीनाग के डोलडुंगरी गांव में कर्ज में डूबे किसान की मौत के बाद से अन्य किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने अब तक सूखा और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया है।

ओलों की मार से किसानों के पास बीज के लायक अनाज भी नहीं है। सभी किसान अब बाजार पर निर्भर हो गए हैं। बाजार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन नहीं मिल पा रहा है। लोग महंगे दामों में राशन खरीद रहे हैं। क्षेत्र के युवा किसानों का कहना है कि सरकार की नीति ऐसी है कि पहाड़ पर कृषि व्यवसाय को ही समाप्त कर दिया जाए, वर्ना अब तक जंगली जानवरों का आतंक समाप्त करने के लिए कोई कदम तो उठाया जाता।
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सरकार और बैंकों में तालमेल नहीं
युवा किसान गिरीश पुनेठा का कहना है कि किसान सब्जी, फसल के लिए कर्ज लेता है। जब आपदा से फसल बर्बाद हो जाए तो कम से कम यह व्यवस्था तो होनी चाहिए कि नुकसान के बराबर कर्ज माफ कर दिया जाए। सरकार की नीति ऐसे मामलों में अलग रहती है और बैंकों के नियम अलग हैं। तालमेल की कमी से ही किसान तनाव में आ रहा है।
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एक महीने में दिया जाए मुआवजा
किसान महिपाल सत्याल का कहना है कि राज्य गठन के बाद भी पहाड़ के छोटे किसानों की समस्या हल नहीं हुई। नीतियां मैदान के आधार पर बनती हैं, जबकि आपदा से नुकसान पहाड़ों पर ज्यादा होता है। वह कहते हैं कि सबसे पहले फसल के नुकसान के दो हफ्ते के भीतर सर्वे कराया जाए और किसानों को एक महीने के भीतर मुआवजे की राशि दी जाए।

सारी स्थिति पर गौर करे सरकार
किसान प्रकाश मेहरा का कहना है कि पहाड़ के किसान का दर्द काफी पुराना है। इस समय एक किसान की आत्महत्या के बाद मामला चर्चा में आया है, लेकिन यदि गौर से देखा जाए तो हर किसान बेहद तनाव में है। उसकी फसल बर्बाद हो रही है। बैंक का कर्ज न चुका पाने से पूरा परिवार बिखर रहा है। उन्होंने कहा कि सारी स्थिति पर सरकार को गौर करना चाहिए।

समस्या का समाधान निकाले सरकार
ग्रामीण किसान विनोद सत्याल का कहना है कि किसानों का तनाव में आना देश के लिए घातक है। देश के कई प्रांतों में किसान आंदोलित हैं। सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। राज्य सरकारें कर्ज माफी का एलान करती हैं तो केंद्र सरकार हाथ खड़े कर देती है। यह स्थिति काफी चिंताजनक है। सरकार को जल्दी इस गंभीर समस्या का समाधान निकालना चाहिए।


किसानों का कर्ज माफ करने की मांग
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। सुगड़ी के जिला पंचायत सदस्य हरीश भंडारी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि इस बार बारिश न होने से किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान मानसिक और आर्थिक तनाव से ग्रसित होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर हैं। यदि सरकार किसानों का कर्ज माफ करती है तो इसका लाभ राज्य के गरीब किसानों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेते हुए कर्ज माफी पर विचार करना चाहिए।
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