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पिथौरागढ़ में शुरू नहीं हो पाया नर्सिंग कालेज
Updated Thu, 02 Aug 2018 11:44 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत की छात्राओं को नर्सिंग में दक्ष करने के लिए खोला जा रहा नर्सिंग कॉलेज का भवन अभी अधूरा है। इसी वर्ष से कॉलेज में पढ़ाई शुरू होनी थी, लेकिन कॉलेज के अधर में होने से यहां के बच्चों को हल्द्वानी से पढ़ाई करनी पड़ रही है।
कांग्रेस शासनकाल में टीबी अस्पताल के भवनों को तोड़कर नर्सिंग कॉलेज बनाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 17.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। कॉलेज में 252 छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल बनना था। नर्सिंग कॉलेज का कार्य तीन वर्ष पूर्व शुरू किया गया था, इसमें एकेडमिक भवन, प्रधानाचार्य आवास, स्टाफ कर्मचारियों के आवास बनाने थे। यूपी निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था और सीएमओ को नोडल एजेंसी बनाया गया।
शुरुआत में तो तेजी से कार्य हुआ, लेकिन बाद में इसमें सुस्ती आ गई। नोडल एजेंसी को कार्य पूरा होने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग को इसे हैंडओवर करना था। इसी वर्ष से कॉलेज में पढ़ाई शुरू होनी थी, लेकिन धनाभाव के चलते हॉस्टल का कार्य पूरा नहीं हो पाया।
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यूपी निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय चौधरी ने बताया कि अवमुक्त धनराशि से एकेडमिक भवन का कार्य पूरा कर लिया गया है। बिजली और पानी के संयोजन भी ले लिए हैं। विभाग को करीब 21 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट बनाकर दिया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने भी नर्सिंग कॉलेज का कार्य समय पर पूरा कर पढ़ाई सुचारु करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद देहरादून में स्वास्थ्य विभाग में हुई बैठक के बाद अब धन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। चौधरी ने बताया कि धनराशि जारी होने के बाद हॉस्टल का कार्य करीब तीन माह के भीतर पूरा कर दिया जाएगा।
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कांग्रेस शासनकाल में टीबी अस्पताल के भवनों को तोड़कर नर्सिंग कॉलेज बनाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 17.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। कॉलेज में 252 छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल बनना था। नर्सिंग कॉलेज का कार्य तीन वर्ष पूर्व शुरू किया गया था, इसमें एकेडमिक भवन, प्रधानाचार्य आवास, स्टाफ कर्मचारियों के आवास बनाने थे। यूपी निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था और सीएमओ को नोडल एजेंसी बनाया गया।
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शुरुआत में तो तेजी से कार्य हुआ, लेकिन बाद में इसमें सुस्ती आ गई। नोडल एजेंसी को कार्य पूरा होने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग को इसे हैंडओवर करना था। इसी वर्ष से कॉलेज में पढ़ाई शुरू होनी थी, लेकिन धनाभाव के चलते हॉस्टल का कार्य पूरा नहीं हो पाया।
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यूपी निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय चौधरी ने बताया कि अवमुक्त धनराशि से एकेडमिक भवन का कार्य पूरा कर लिया गया है। बिजली और पानी के संयोजन भी ले लिए हैं। विभाग को करीब 21 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट बनाकर दिया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने भी नर्सिंग कॉलेज का कार्य समय पर पूरा कर पढ़ाई सुचारु करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद देहरादून में स्वास्थ्य विभाग में हुई बैठक के बाद अब धन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। चौधरी ने बताया कि धनराशि जारी होने के बाद हॉस्टल का कार्य करीब तीन माह के भीतर पूरा कर दिया जाएगा।