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दो साल से जंगल को हराभरा करने में जुटे हरवंश
Updated Wed, 24 Jan 2018 10:49 PM IST
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पिथौरागढ़। देवलथल तहसील के ग्राम पंचायत बसौड़ निवासी 55 वर्षीय हरवंश सिंह चौहान दो साल से जंगल को हराभरा करने में जुटे हैं। अप्रैल 2016 में उन्होंने गांव के पास के वीरान जंगल को हराभरा करने का बीड़ा उठाया और अब बिना किसी सरकारी मदद के उन्होंने इस वीरान पहाड़ी पर कई प्रकार के फलों के पौधे तैयार कर लिए हैं। वह सब्जियों का उत्पादन करने लगे हैं।
जिस स्थान पर उन्होंने यह प्रयोग किया, वहां पर बिजली भी नहीं है। पानी करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने सबसे पहले पानी की अस्थायी लाइन तैयार की। पानी के संग्रह के लिए टंकियों का निर्माण किया। जंगल के ढलानों को समतल कर उनमें पौधरोपण जैसी परिस्थिति तैयार की।
हरवंश की गांव में ही छोटी सी दुकान है। वह कहते हैं कि पहाड़ पर काफी जमीन बेकार चली जाती है। यदि इस जमीन को संवारा जाए तो वह आजीविका का साधन भी बन सकती है। आठ अप्रैल 2016 को हरवंश ने इस पहाड़ी को उपयोगी बनाने का प्रयास किया। सबसे पहले उन्होंने जमीन में आम, अमरूद, केला, संतरा, माल्टा, कटहल, च्यूरा, अनार, बेल, तेजपत्ता, अलबेरा, आंवला के पौधे रोपे।
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इन पौधों को पनपने का सही माहौल मिल गया। इसके बाद उन्होंने इस जमीन पर मूली, मेथी, धनिया जैसी सब्जियों को उगाना शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि नई मिट्टी में सब्जी और पौध बहुत जल्दी पनपते हैं। अभी हालांकि उन्होंने अपने उत्पादों का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया है, लेकिन वह कहते हैं कि अगले साल से कई पेड़ों में फल आने लगेंगे और आमदनी होने लगेगी।
जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने बुधवार को बसौड़ गांव का दौरा करने के बाद बताया कि यदि सरकार ऐसे काम को प्रोत्साहित करे तो अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल जाएगी।
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जिस स्थान पर उन्होंने यह प्रयोग किया, वहां पर बिजली भी नहीं है। पानी करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने सबसे पहले पानी की अस्थायी लाइन तैयार की। पानी के संग्रह के लिए टंकियों का निर्माण किया। जंगल के ढलानों को समतल कर उनमें पौधरोपण जैसी परिस्थिति तैयार की।
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हरवंश की गांव में ही छोटी सी दुकान है। वह कहते हैं कि पहाड़ पर काफी जमीन बेकार चली जाती है। यदि इस जमीन को संवारा जाए तो वह आजीविका का साधन भी बन सकती है। आठ अप्रैल 2016 को हरवंश ने इस पहाड़ी को उपयोगी बनाने का प्रयास किया। सबसे पहले उन्होंने जमीन में आम, अमरूद, केला, संतरा, माल्टा, कटहल, च्यूरा, अनार, बेल, तेजपत्ता, अलबेरा, आंवला के पौधे रोपे।
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इन पौधों को पनपने का सही माहौल मिल गया। इसके बाद उन्होंने इस जमीन पर मूली, मेथी, धनिया जैसी सब्जियों को उगाना शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि नई मिट्टी में सब्जी और पौध बहुत जल्दी पनपते हैं। अभी हालांकि उन्होंने अपने उत्पादों का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया है, लेकिन वह कहते हैं कि अगले साल से कई पेड़ों में फल आने लगेंगे और आमदनी होने लगेगी।
जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने बुधवार को बसौड़ गांव का दौरा करने के बाद बताया कि यदि सरकार ऐसे काम को प्रोत्साहित करे तो अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल जाएगी।