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कनालीछीना में डिग्री कालेज का मुद्दा हावी
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में समस्याओं का अंबार है। बावजूद आज तक प्रदेश की सत्ता पर राज कर रही सरकारों ने कभी भी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास नहीं किया। यही कारण है कि सीमांत के कई गांवों के लोग ठीक लोकसभा चुनाव से पहले समस्याओं के समाधान को मुखर होकर सामने आ रहे हैं। प्रशासन के स्तर पर भले ही लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र अभी चुनावी शोर से काफी दूर है।
कनालीछीना विकास खंड में महाविद्यालय की स्थापना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नेपाल सीमा से लगे गांवों में नेटवर्क की समस्या मुद्दा बने हुए हैं। कनालीछीना में पूर्ववर्ती डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक सरकार ने महाविद्यालय की घोषणा की थी। डिग्री कॉलेज के भवन निर्माण के नाम पर टिन शेड भी बना दिया गया। बावजूद इसके कॉलेज को अन्यत्र खोल दिया। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की गई।
सीमा पर स्थित गांवों पीपली और बगड़ के साथ ही जिला मुख्यालय से महज 20 किमी की दूरी पर बसे सतगढ़ गांव में नेटवर्क तक मिल पाते हैं। इससे क्षेत्र की जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनमें स्थानीय जन प्रतिनिधियों को लेकर काफी रोष पनप रहा है। राज्य आंदोलनकारी राजेश मेहता और हेमेंद्र बिष्ट का कहना है कि कई बार समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
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कनालीछीना विकास खंड में महाविद्यालय की स्थापना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नेपाल सीमा से लगे गांवों में नेटवर्क की समस्या मुद्दा बने हुए हैं। कनालीछीना में पूर्ववर्ती डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक सरकार ने महाविद्यालय की घोषणा की थी। डिग्री कॉलेज के भवन निर्माण के नाम पर टिन शेड भी बना दिया गया। बावजूद इसके कॉलेज को अन्यत्र खोल दिया। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की गई।
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सीमा पर स्थित गांवों पीपली और बगड़ के साथ ही जिला मुख्यालय से महज 20 किमी की दूरी पर बसे सतगढ़ गांव में नेटवर्क तक मिल पाते हैं। इससे क्षेत्र की जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनमें स्थानीय जन प्रतिनिधियों को लेकर काफी रोष पनप रहा है। राज्य आंदोलनकारी राजेश मेहता और हेमेंद्र बिष्ट का कहना है कि कई बार समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
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