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आपदा के हालात, बेटी के अंतिम दर्शन नहीं कर पाई मां
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:16 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। आपदा के 19 दिन के बाद भी हरकोट गांव के हालात नहीं सुधरे हैं। हालात यहां तक खराब हो गए हैं कि एक मां अपनी पुत्री के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाई।
हरकोट निवासी मीना (18) पुत्री नरेंद्र सिंह एक माह पहले से पीलिया से पीड़ित थी। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में उसका इलाज चल रहा था। पीलिया बिगड़ने पर 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। यह सूचना जब मीना की मां राजुला देवी को मिली तो उसने अपनी बेटी के अंतिम दर्शन करने की इच्छा जताई। उसके परिजन इस आपदा काल में हल्द्वानी से मुनस्यारी लगभग 300 किमी की कठिन यात्रा कर शव को मुनस्यारी तक ले आए, लेकिन मुनस्यारी से मात्र चार किमी दूर हरकोट तक शव नहीं ले जा सके।
मुनस्यारी से हरकोट तक का पैदल मार्ग और पीएमजीएसवाई का मार्ग पैदल चलने लायक नहीं है। नतीजतन मां को अपनी बेटी के अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके। पैदल रास्ते और मोटर मार्गों को खोलने के लिए प्रशासन कितनी ईमानदारी से कार्य कर रहा है, बंद मार्ग इसका ज्वलंत उदाहरण है। आपदा राहत के प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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हरकोट निवासी मीना (18) पुत्री नरेंद्र सिंह एक माह पहले से पीलिया से पीड़ित थी। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में उसका इलाज चल रहा था। पीलिया बिगड़ने पर 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। यह सूचना जब मीना की मां राजुला देवी को मिली तो उसने अपनी बेटी के अंतिम दर्शन करने की इच्छा जताई। उसके परिजन इस आपदा काल में हल्द्वानी से मुनस्यारी लगभग 300 किमी की कठिन यात्रा कर शव को मुनस्यारी तक ले आए, लेकिन मुनस्यारी से मात्र चार किमी दूर हरकोट तक शव नहीं ले जा सके।
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मुनस्यारी से हरकोट तक का पैदल मार्ग और पीएमजीएसवाई का मार्ग पैदल चलने लायक नहीं है। नतीजतन मां को अपनी बेटी के अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके। पैदल रास्ते और मोटर मार्गों को खोलने के लिए प्रशासन कितनी ईमानदारी से कार्य कर रहा है, बंद मार्ग इसका ज्वलंत उदाहरण है। आपदा राहत के प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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