{"_id":"5a1af16f4f1c1b001c8b52e1","slug":"151511715183-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तड़ीगांव नहर में नहीं चला पानी, किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तड़ीगांव नहर में नहीं चला पानी, किसान परेशान
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थल (पिथौरागढ़)। डोकना नाले से तड़ीगांव के लिए बनी नहर में अब तक पानी नहीं चल पाया है। बारिश के मौसम में जगह-जगह टूटी इस नहर की मरम्मत के लिए विभाग ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है। खेतों में पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। नहर का पानी पांच गांवों के खेतों तक जाता है और करीब 200 हेक्टेयर जमीन पर पानी के अभाव में बुआई नहीं हो पाई है। लोग विभाग की अनदेखी से गुस्से में हैं।
1956 में डोकना नाले से तड़ीगांव, मालासीमा, मस्मोली, भकुना, चलियागांव, कुमालगांव में खेतों की सिंचाई के लिए नहर का निर्माण किया गया था। बारिश के मौसम में हर साल नहर को नुकसान पहुंचता है। विभाग बारिश बंद होते ही अन्य वर्षों तक अक्तूबर में नहर की मरम्मत कर पानी चला देता था, लेकिन इस बार अब तक नहर की मरम्मत के लिए कोई टीम नहीं पहुंची है।
तड़ीगांव निवासी किसान भानी चंद ने बताया कि खेतों में नहर का पानी पहुंचने के बाद ही बुआई संभव हो पाती है। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी फसलों को तबाह करने में तुले हैं। उन्होंने बताया कि यदि नहर में थोड़ी मरम्मत की जरूरत होती तो गांव के लोग खुद ही श्रमदान से यह काम कर लेते, लेकिन नहर इतनी ज्यादा टूटी है कि उसमें मरम्मत के लिए बड़ा काम करना पड़ेगा।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पीके दीक्षित ने बताया कि नहर की स्थिति की जानकारी लेने के लिए अवर अभियंता को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मरम्मत कर नहर में पानी चलाने के प्रयास किए जाएंगे।
विज्ञापन
1956 में डोकना नाले से तड़ीगांव, मालासीमा, मस्मोली, भकुना, चलियागांव, कुमालगांव में खेतों की सिंचाई के लिए नहर का निर्माण किया गया था। बारिश के मौसम में हर साल नहर को नुकसान पहुंचता है। विभाग बारिश बंद होते ही अन्य वर्षों तक अक्तूबर में नहर की मरम्मत कर पानी चला देता था, लेकिन इस बार अब तक नहर की मरम्मत के लिए कोई टीम नहीं पहुंची है।
विज्ञापन
तड़ीगांव निवासी किसान भानी चंद ने बताया कि खेतों में नहर का पानी पहुंचने के बाद ही बुआई संभव हो पाती है। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी फसलों को तबाह करने में तुले हैं। उन्होंने बताया कि यदि नहर में थोड़ी मरम्मत की जरूरत होती तो गांव के लोग खुद ही श्रमदान से यह काम कर लेते, लेकिन नहर इतनी ज्यादा टूटी है कि उसमें मरम्मत के लिए बड़ा काम करना पड़ेगा।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पीके दीक्षित ने बताया कि नहर की स्थिति की जानकारी लेने के लिए अवर अभियंता को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मरम्मत कर नहर में पानी चलाने के प्रयास किए जाएंगे।