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बस्तड़ी के 15 परिवार अन्यत्र जाने की तैयारी में

Sun, 17 Jul 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट Updated Sun, 17 Jul 2016 10:30 PM IST
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15 family preparing to go elsewhere Bstdi
बस्तड़ी में जमा मलबा - फोटो : अमर उजाला

बुरी तरह टूट चुके बस्तड़ी गांव के शेष बचे 15 परिवार भी अन्यत्र जाने की तैयारी में हैं। उन्होंने पिथौरागढ़, हल्द्वानी, खटीमा, टनकपुर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से संपर्क साधा है। वह भी किसी समय यहां से जा सकते हैं। अब कोई भी परिवार खतरे से घिर चुके इस इलाके में रहने को तैयार नहीं है।

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बस्तड़ी गांव की मनीषा भट्ट अपने बच्चों समेत पिथौरागढ़ चली गई हैं। उनके पति गिरीश भट्ट की हादसे में मौत हो गई थी। इसी तरह कविता भट्ट और बसंती देवी भी गांव छोड़कर अपने मायके जा चुकी हैं। इन दोनों के पति भी हादसे का शिकार हुए थे। गांव के शेष 15 परिवार किसी भी समय यहां से जा सकते हैं। गांव के लक्ष्मीदत्त भट्ट ने बताया कि हादसे में उनके पिता माधवानंद की मौत हो गई थी। अब वह अपने बच्चों को इस खतरे के बीच नहीं रखना चाहते। उन्होंने कहा कि सरकार के पास आपदा पुनर्वास की कोई नीति नहीं है। कुछ दिन तक अधिकारी दौड़भाग करते रहे। बाद में सभी ने इस इलाके की ओर देखना बंद कर दिया है।
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वह कहते हैं कि जिले के कई गांव हाल के वर्षों में आपदा के शिकार हुए, लेकिन किसी भी गांव का पुनर्वास सरकार ने नहीं किया। गांव के समाजसेवी शंकर दत्त भट्ट कहते हैं कि सरकार ने अब तक कोई ऐसा कदम नहीं उठाया, जिससे थोड़ी आस बंधती हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने गांव के लोगों को रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। वह कहते हैं कि बस्तड़ी में अब कोई नहीं रहेगा। राहत कैंपों में कब तक जिंदगी कटेगी यह बड़ा सवाल है।

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