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विदिशा, टेरेसा की मदद को आगे आए भंडारी
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:09 PM IST
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। सड़क दुर्घटना में माता-पिता को खोने वाली दो बेटियों विदिशा और टेरेसा की मदद को पूर्व जिपं अध्यक्ष किशन भंडारी आगे आए हैं। उन्होंने बच्चियों के घर पहुंचकर दोनों को गोद लेने की इच्छा जताई है। हालांकि बच्चियों के ताऊ ने गोद देने से इनकार करते हुए उनकी मदद की पहल की सराहना की है।
23 नवंबर को नेपाल के मड़ में एक बस दुर्घटना में ऊंचाकोट निवासी अनिल पाल और उनकी पत्नी हिमालया की मौत हो गई। मां-बाप की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियां अनाथ हो गईं। बड़ी बेटी विदिशा (13) हिम ज्योति स्कूल देहरादून और टेरेसा (9) जवाहर नवोदय विद्यालय गंगोलीहाट में पढ़ाई कर रही हैं। दोनों बहनें पढ़ने में काफी होशियार हैं।
माता-पिता की मौत के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी उनके ताऊ प्रदीप पाल पर आ गई है। ताऊ भी गांव में बेरोजगार हैं। पूर्व जिपं अध्यक्ष भंडारी को जब दोनों बेटियों पर दुखों का पहाड़ टूटने की जानकारी मिली तो वह उनके घर पहुंचे। उन्होंने प्रदीप पाल के समक्ष दोनों बेटियों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई और बाद में शादी का सारा खर्च वहन करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी बेटियों की तरह ही दोनों की देखभाल करेंगे।
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जब भी बच्चियां चाहेंगी अपने परिजनों से मिल सकेंगी। इस पर बच्चियों के ताऊ ने उनका आभार जताते हुए कहा कि यदि वह मदद करना चाहे तो स्वागत है, लेकिन अपने भाई की निशानियों को वह गोद नहीं दे सकते हैं। भंडारी का कहना है कि वह गोद लेने को प्राथमिकता देंगे। यदि इसके बाद भी परिजन राजी नहीं होते हैं तो वह अपनी ओर से विदिशा और टेरेसा की हर संभव मदद करने को तैयार हैं।
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23 नवंबर को नेपाल के मड़ में एक बस दुर्घटना में ऊंचाकोट निवासी अनिल पाल और उनकी पत्नी हिमालया की मौत हो गई। मां-बाप की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियां अनाथ हो गईं। बड़ी बेटी विदिशा (13) हिम ज्योति स्कूल देहरादून और टेरेसा (9) जवाहर नवोदय विद्यालय गंगोलीहाट में पढ़ाई कर रही हैं। दोनों बहनें पढ़ने में काफी होशियार हैं।
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माता-पिता की मौत के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी उनके ताऊ प्रदीप पाल पर आ गई है। ताऊ भी गांव में बेरोजगार हैं। पूर्व जिपं अध्यक्ष भंडारी को जब दोनों बेटियों पर दुखों का पहाड़ टूटने की जानकारी मिली तो वह उनके घर पहुंचे। उन्होंने प्रदीप पाल के समक्ष दोनों बेटियों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई और बाद में शादी का सारा खर्च वहन करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी बेटियों की तरह ही दोनों की देखभाल करेंगे।
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जब भी बच्चियां चाहेंगी अपने परिजनों से मिल सकेंगी। इस पर बच्चियों के ताऊ ने उनका आभार जताते हुए कहा कि यदि वह मदद करना चाहे तो स्वागत है, लेकिन अपने भाई की निशानियों को वह गोद नहीं दे सकते हैं। भंडारी का कहना है कि वह गोद लेने को प्राथमिकता देंगे। यदि इसके बाद भी परिजन राजी नहीं होते हैं तो वह अपनी ओर से विदिशा और टेरेसा की हर संभव मदद करने को तैयार हैं।