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उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीव सुरक्षा को बनाई रणनीति
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पिथौरागढ़। सिक्योर हिमालय परियोजना के अंतर्गत वन्यजीव अपराध, अवैध शिकार और तस्करी रोकने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा को बनाई गई रणनीति की जानकारी दी गई।
वन विभाग के डाफिया सभागार में प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव की अध्यक्षता में वन, पुलिस, आईटीबीपी, एसएसबी और धारचूला वन क्षेत्र के दारमा घाटी के हितधारकों की संयुक्त कार्यशाला में यूएनडीपी देहरादून भाष्कर जोशी, ट्रैफिक इंडिया दिल्ली के प्रमोद कुमार यादव, अरुण कुमार, सुभजीत साह, रिजवान अली खान ने सिक्योर हिमालय परियोजना की जानकारी दी।
कार्यशाला में दारमा घाटी में हिम तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के अवैध शिकार, अंगों की तस्करी की रोकथाम पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विचार-विमर्श किया गया। विभागों ने आपसी सहयोग से उच्च हिमालयी दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध तस्करी की रोकथाम के लिए रणनीति तैयार की। वनाधिकारी डॉ. भार्गव ने जैव विविधता के संरक्षण और आजीविका सुधार कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी के माध्यम से वन्यजीव, अंगों की तस्करी की रोकथाम की जानकारी दी। साथ ही पुलिस से सहयोग की भी अपील की। बताया कि परियोजना अंतर्गत प्रथम फेज में आजीविका एवं संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण विभाग द्वारा दिया जाएगा। उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप का प्रयोग किए जाने का भी प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही अपेक्षा जताई कि वन विभाग और आईटीबीपी के संयुक्त प्रयासों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण किया जाएगा।
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कार्यशाला में एसआई श्वेता दिगारी, एसएसबी के निरीक्षक रमेश प्रसाद, धर्मेंद्र सिंह, आईटीबीपी के निरीक्षक त्रिलोक सिंह, वन क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार, राजेंद्र बिष्ट, दिनेश जोशी आदि थे।
वन विभाग के डाफिया सभागार में प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव की अध्यक्षता में वन, पुलिस, आईटीबीपी, एसएसबी और धारचूला वन क्षेत्र के दारमा घाटी के हितधारकों की संयुक्त कार्यशाला में यूएनडीपी देहरादून भाष्कर जोशी, ट्रैफिक इंडिया दिल्ली के प्रमोद कुमार यादव, अरुण कुमार, सुभजीत साह, रिजवान अली खान ने सिक्योर हिमालय परियोजना की जानकारी दी।
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कार्यशाला में दारमा घाटी में हिम तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के अवैध शिकार, अंगों की तस्करी की रोकथाम पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विचार-विमर्श किया गया। विभागों ने आपसी सहयोग से उच्च हिमालयी दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध तस्करी की रोकथाम के लिए रणनीति तैयार की। वनाधिकारी डॉ. भार्गव ने जैव विविधता के संरक्षण और आजीविका सुधार कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी के माध्यम से वन्यजीव, अंगों की तस्करी की रोकथाम की जानकारी दी। साथ ही पुलिस से सहयोग की भी अपील की। बताया कि परियोजना अंतर्गत प्रथम फेज में आजीविका एवं संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण विभाग द्वारा दिया जाएगा। उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप का प्रयोग किए जाने का भी प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही अपेक्षा जताई कि वन विभाग और आईटीबीपी के संयुक्त प्रयासों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण किया जाएगा।
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कार्यशाला में एसआई श्वेता दिगारी, एसएसबी के निरीक्षक रमेश प्रसाद, धर्मेंद्र सिंह, आईटीबीपी के निरीक्षक त्रिलोक सिंह, वन क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार, राजेंद्र बिष्ट, दिनेश जोशी आदि थे।