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पत्रकारिता के कम होते प्रभाव पर चिंता जताई
Updated Wed, 30 May 2018 11:24 PM IST
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पिथौरागढ़। हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विभिन्न स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान पत्रकारिता के कम होते प्रभाव पर चिंता जताई गई।
जिला पत्रकार संगठन के अध्यक्ष बीडी कसनियाल की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में कहा गया कि जिस तेजी से पत्रकारों की हत्या हो रही है, उसकी तुलना में इन हत्याओं के प्रति क्रोध की अभिव्यक्ति नहीं हो रही है। इससे साफ है कि सरकारें पत्रकारों को संचार साधन मानने लगी हैं। गोष्ठी के दौरान विश्वभर में मारे गए पत्रकारों के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान कमलेश पाठक, प्रेम पुनेठा, चंद्रशेखर द्विवेदी, कोमल मेहता, कुंडल चौहान, ओपी अवस्थी, रमेश गढ़कोटी आदि मौजूद थे।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग में हुई गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. डीएस पांगती, विभागाध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ल, डॉ. मनीषा पांडेय, डॉ. नीलाक्षी जोशी, वशुंधरा उपाध्याय ने हिंदी पत्रकारिता पर विचार रखे। निखिलेश्वर चिल्ड्रेन एकेडमी में सामाजिक चिंतक डॉ. तारा सिंह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिंदी पत्रकारिता का अहम योगदान रहा है। इस दौरान प्रधानाचार्य ममता सिंह ने भी विचार रखे। सोरवैली स्कूल में भी डॉ. तारा सिंह के नेतृत्व में गोष्ठी हुई। इस दौरान ललित शौर्य, महेश टम्टा, ललिताकापड़ी आदि ने विचार रखे।
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जिला पत्रकार संगठन के अध्यक्ष बीडी कसनियाल की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में कहा गया कि जिस तेजी से पत्रकारों की हत्या हो रही है, उसकी तुलना में इन हत्याओं के प्रति क्रोध की अभिव्यक्ति नहीं हो रही है। इससे साफ है कि सरकारें पत्रकारों को संचार साधन मानने लगी हैं। गोष्ठी के दौरान विश्वभर में मारे गए पत्रकारों के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान कमलेश पाठक, प्रेम पुनेठा, चंद्रशेखर द्विवेदी, कोमल मेहता, कुंडल चौहान, ओपी अवस्थी, रमेश गढ़कोटी आदि मौजूद थे।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग में हुई गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. डीएस पांगती, विभागाध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ल, डॉ. मनीषा पांडेय, डॉ. नीलाक्षी जोशी, वशुंधरा उपाध्याय ने हिंदी पत्रकारिता पर विचार रखे। निखिलेश्वर चिल्ड्रेन एकेडमी में सामाजिक चिंतक डॉ. तारा सिंह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिंदी पत्रकारिता का अहम योगदान रहा है। इस दौरान प्रधानाचार्य ममता सिंह ने भी विचार रखे। सोरवैली स्कूल में भी डॉ. तारा सिंह के नेतृत्व में गोष्ठी हुई। इस दौरान ललित शौर्य, महेश टम्टा, ललिताकापड़ी आदि ने विचार रखे।
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