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सीमांत वाले चार से आंदोलन करेंगे
Updated Thu, 29 Mar 2018 10:56 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। लखनपुर से नजंग के बीच रास्ता क्षतिग्रस्त होने से आवागमन पूरी तरह बंद है। महीने भर बाद भी न पुल बनाया गया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे माइग्रेशन से लौटने वालों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई। इस पर सीमांत के लोगों ने भारत और नेपाल सरकार पर हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए चार अप्रैल से आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने सात को चक्काजाम और 14 को भारत-नेपाल झूलापुल बंद करने की चेतावनी दी है। लोगों में सड़क निर्माण कर रही कंपनी के खिलाफ भी गुस्सा है।
सीमांत के विभिन्न संगठनों ने बृहस्पतिवार को एसडीएम के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजा। बताया कि लखनपुर से नजंग के बीच बीती छह फरवरी को भूस्खलन से मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण लोग उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नहीं जा पा रहे हैं। कुछ ही दिन बाद लोगों को शीतकालीन प्रवास से मूल निवास के लिए लौटना है, लेकिन रास्ता क्षतिग्रस्त होने से माइग्रेशन से लौटने वालों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। आरोप लगाया कि भारत और नेपाल सरकार मामले को हल्के में ले रही हैं। रास्ता नहीं बना तो प्रवास से लौटने वाले ग्रामीणों के याक, झुप्पू आदि मवेशियों की गर्मी के कारण मौत हो जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी अगर जल्द कदम नहीं उठाया तो चार अप्रैल को तहसील कार्यालय परिसर में प्रवास से लौटने वाले लोग मवेशियों समेत धरना देंगे। उसके बाद सात अप्रैल को चक्काजाम किया जाएगा और 14 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय झूलापुल बंद कर दिया जाएगा। एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा। नेपाल से अनुमति मिलते ही अस्थायी पुलों का निर्माण कर दिया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, संरक्षक अशोक नबियाल, यूथ फोरम के अध्यक्ष पूरन ग्वाल, महासचिव राजू कुटियाल, नेपाल के व्यास के प्रधान अशोक बोरा, धीरेंद्र बुडाथोकी, भारत-चीन व्यापार समिति के दिनेश गुंज्याल, दशरथी कुटियाल आदि शामिल थे।
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नेपाल सरकार ने दी अस्थायी पुल बनाने की स्वीकृति
दार्चुला (नेपाल) के विधायक गेल्वु बोरा ने बताया कि नेपाल सरकार के पास 15 दिनों से मामला विचाराधीन था। नेपाल सरकार ने बृहस्पतिवार को लखनपुर और नजंग में अस्थायी पुल बनाने की स्वीकृति दे दी है। इससे माइग्रेशन करने वालों को सुविधा होगी।
दारमा का रास्ता भी दुरुस्त करने की मांग
दारमा के लोगों ने एसडीएम आरके पांडेय से मुलाकात कर धौलीगंगा पर चल गांव को जोड़ने के लिए शीघ्र पुल बनाने की मांग की है। इन लोगों ने चल से फिलम बौन, गो, मार्छा तक सड़क बनाने की भी मांग की है। धौलीगंगा पार होने के कारण दारमा सड़क से नहीं जुड़ पाया है। ज्ञापन देने वालों में दारमा समिति के संरक्षक नारायण दरियाल रमेश तितियाल, भूपेंद्र ग्वाल, लक्ष्मण नगन्याल, जीवन मार्छाल, संजय दताल, मोहन बौनाल, कृष्ण फिरमाल, चैत बौनाल आदि शामिल थे।
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सीमांत के विभिन्न संगठनों ने बृहस्पतिवार को एसडीएम के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजा। बताया कि लखनपुर से नजंग के बीच बीती छह फरवरी को भूस्खलन से मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण लोग उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नहीं जा पा रहे हैं। कुछ ही दिन बाद लोगों को शीतकालीन प्रवास से मूल निवास के लिए लौटना है, लेकिन रास्ता क्षतिग्रस्त होने से माइग्रेशन से लौटने वालों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। आरोप लगाया कि भारत और नेपाल सरकार मामले को हल्के में ले रही हैं। रास्ता नहीं बना तो प्रवास से लौटने वाले ग्रामीणों के याक, झुप्पू आदि मवेशियों की गर्मी के कारण मौत हो जाएगी।
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उन्होंने चेतावनी दी अगर जल्द कदम नहीं उठाया तो चार अप्रैल को तहसील कार्यालय परिसर में प्रवास से लौटने वाले लोग मवेशियों समेत धरना देंगे। उसके बाद सात अप्रैल को चक्काजाम किया जाएगा और 14 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय झूलापुल बंद कर दिया जाएगा। एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा। नेपाल से अनुमति मिलते ही अस्थायी पुलों का निर्माण कर दिया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, संरक्षक अशोक नबियाल, यूथ फोरम के अध्यक्ष पूरन ग्वाल, महासचिव राजू कुटियाल, नेपाल के व्यास के प्रधान अशोक बोरा, धीरेंद्र बुडाथोकी, भारत-चीन व्यापार समिति के दिनेश गुंज्याल, दशरथी कुटियाल आदि शामिल थे।
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नेपाल सरकार ने दी अस्थायी पुल बनाने की स्वीकृति
दार्चुला (नेपाल) के विधायक गेल्वु बोरा ने बताया कि नेपाल सरकार के पास 15 दिनों से मामला विचाराधीन था। नेपाल सरकार ने बृहस्पतिवार को लखनपुर और नजंग में अस्थायी पुल बनाने की स्वीकृति दे दी है। इससे माइग्रेशन करने वालों को सुविधा होगी।
दारमा का रास्ता भी दुरुस्त करने की मांग
दारमा के लोगों ने एसडीएम आरके पांडेय से मुलाकात कर धौलीगंगा पर चल गांव को जोड़ने के लिए शीघ्र पुल बनाने की मांग की है। इन लोगों ने चल से फिलम बौन, गो, मार्छा तक सड़क बनाने की भी मांग की है। धौलीगंगा पार होने के कारण दारमा सड़क से नहीं जुड़ पाया है। ज्ञापन देने वालों में दारमा समिति के संरक्षक नारायण दरियाल रमेश तितियाल, भूपेंद्र ग्वाल, लक्ष्मण नगन्याल, जीवन मार्छाल, संजय दताल, मोहन बौनाल, कृष्ण फिरमाल, चैत बौनाल आदि शामिल थे।