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जन्मभूमि खोने के डर के साथ विस्थापन को लेकर सवाल

Fri, 11 Aug 2017 11:24 PM IST
Updated Fri, 11 Aug 2017 11:24 PM IST
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जन्मभूमि खोने के डर के साथ विस्थापन को लेकर सवाल
पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध की पर्यावरणीय जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने दिल खोलकर अपनी बातें सामने रखी। लोगों के मन में अपनी जन्मभूमि को खोने के डर के साथ ही विस्थापन को लेकर सवाल थे। जिला मुख्यालय में जनसुनवाई करने को लेकर भी लोगों में नाराजगी थी। अमर उजाला ने बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले के मन की थाह ली। प्रस्तुत है उनकी जुबानी।
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लोगों की वेदना को समझे सरकार
पंचेश्वर के नजदीक सेल गांव से जनसुनवाई में पहुंचे त्रिलोचन भट्ट ने पंचेश्वर बांध को डेथ वारंट की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि यदि विस्थापन का सवाल सही ढंग से हल नहीं हुआ तो प्रभावित लोग कहीं के नहीं रहेंगे। कहते हैं कि शिक्षा, अस्पताल की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
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गांव और तहसील स्तर पर हो सुनवाई
रैतोला (गंगोलीहाट) के प्रधान मदन राम कहते हैं कि जनसुनवाई जिला मुख्यालय में करने का कोई औचित्य नहीं है। जनसुनवाई ग्राम स्तर पर होनी चाहिए, यह संभव नहीं है तो तहसील स्तर पर तो कम से कम जनसुनवाई की जा सकती थी।
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बांध का पूरा विरोध करेंगे
कुन्तोला (गंगोलीहाट) के ग्राम प्रधान गोविंद सिंह खाती का कहना था कि आजादी के 70 साल बाद उनके इलाके में मोटर सड़क पहुंची है। स्कूल खुले हैं, अस्पताल बन रहे हैं। यह सब बांध की भेंट चढ़ जाएंगे। इसलिए वह लोग बांध का पूरा विरोध करेंगे। अपना गांव किसी हालत में नहीं छोड़ेंगे।

सुविधाजनक स्थान पर होना चाहिए विस्थापन
झूलाघाट निवासी चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि वह लोग 1000 साल से वहां रह रहे हैं। उनकी 40 पुस्तों ने वहां पर जिंदगी गुजारी है। बगैर ठोस नीति के घर, गांव नहीं छोड़ेंगे। सुविधाजनक स्थान पर सारी सुविधाओं के साथ विस्थापन होना चाहिए। सर्किल रेट से कम से कम 10 गुना जमीन का मुआवजा मिलना चाहिए।

कोई एजेंसी सर्वे के लिए गांव नहीं आई
पलचौड़ा (पाटी सल्लाचिंगरी) निवासी गणेश चंद ने बांध की डीपीआर पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बांध प्राधिकरण की कोई भी एजेंसी गांवों में सर्वे के लिए नहीं आई। फिर कैसे डीपीआर तैयार कर ली। कहा कि जिले के 87 गांवों को बांध से प्रभावित दिखाया जा रहा है। जबकि 500 से अधिक गांव प्रभावित होने वाले हैं।


जौलजीबी को गांव कैसे दर्शाया
जौलजीबी की शकुंतला दताल भी बांध की डीपीआर पर सवाल खड़ा करती हैं। उनका कहना था कि जौलजीबी को दूतीबगड़ गांव दर्शाया गया है। दताल ने कहा बांध प्रभावितों को स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य आदि सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
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