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सीमा सड़क संगठन बना रोजगार का जरिया
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:28 PM IST
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)।
सीमांत के लोगों के लिए सीमा सड़क संगठन रोजगार का जरिया बनने लगा है। मानदेय में बढ़ोतरी के बाद लोगों का रुझान बीआरओ के प्रति और बढ़ा है। सिडकुल से नौकरी छोड़कर युवा बीआरओ में मजदूरी करने लगे हैं।
बीआरओ में पहले मजदूरों को 7100 रुपये मासिक मजदूरी का भुगतान होता था। अगस्त 2017 में सीमा सड़क संगठन ने मजदूरी बढ़ाकर 10800 रुपये कर दी। मजदूरी बढ़ने से पहले सीमा सड़क संगठन में नेपाल और बिहार के लोग मजदूरी करते थे। मजदूरी बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों को रुझान तेजी से बीआरओ की ओर बढ़ा है। वर्तमान में जिला मुख्यालय से जाजरदेवल से कनालीछीना से आगे बंदरलीमा तक बीआरओ का सड़क चौड़ीकरण, हॉटमिक्स का काम चल रहा है। करीब 100 स्थानीय लोग बीआरओ में मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं।
मितड़ा (मलान) निवासी कमलेश कुमार, संजय राम, केशव राम, दिनेश सिंह ने बताया कि वह लोग सिडकुल में काम कर रहे थे। उन्हें वहां 8 से 10 हजार रुपये मानदेय मिलता था। बीआरओ में उससे अधिक रकम मिल रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि घर पर नौकरी मिल रही है। घर में रहकर, घर का खाना खाकर काम कर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन के अवर अभियंता पीएस पिंगल का कहना है कि कनालीछीना क्षेत्र में काम पूरा होने के बाद यह लोग अन्य जगह भी काम कर सकते हैं।
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महिलाएं भी करने लगी बीआरओ में काम
सीमा सड़क संगठन को महिलाओं ने भी रोजगार का जरिया बना लिया है। अस्कोड़ा निवासी भागा भंडारी, कनालीछीना निवासी विशना देवी, जानकी देवी, मातोली निवासी देवकी देवी सीमा सड़क संगठन में काम कर अपना घर चला रही हैं। कहती हैं कि घर का खर्च चलाने के बाद कुछ बचत भी कर लेती हैं।
सीमांत के लोगों के लिए सीमा सड़क संगठन रोजगार का जरिया बनने लगा है। मानदेय में बढ़ोतरी के बाद लोगों का रुझान बीआरओ के प्रति और बढ़ा है। सिडकुल से नौकरी छोड़कर युवा बीआरओ में मजदूरी करने लगे हैं।
बीआरओ में पहले मजदूरों को 7100 रुपये मासिक मजदूरी का भुगतान होता था। अगस्त 2017 में सीमा सड़क संगठन ने मजदूरी बढ़ाकर 10800 रुपये कर दी। मजदूरी बढ़ने से पहले सीमा सड़क संगठन में नेपाल और बिहार के लोग मजदूरी करते थे। मजदूरी बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों को रुझान तेजी से बीआरओ की ओर बढ़ा है। वर्तमान में जिला मुख्यालय से जाजरदेवल से कनालीछीना से आगे बंदरलीमा तक बीआरओ का सड़क चौड़ीकरण, हॉटमिक्स का काम चल रहा है। करीब 100 स्थानीय लोग बीआरओ में मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं।
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मितड़ा (मलान) निवासी कमलेश कुमार, संजय राम, केशव राम, दिनेश सिंह ने बताया कि वह लोग सिडकुल में काम कर रहे थे। उन्हें वहां 8 से 10 हजार रुपये मानदेय मिलता था। बीआरओ में उससे अधिक रकम मिल रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि घर पर नौकरी मिल रही है। घर में रहकर, घर का खाना खाकर काम कर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन के अवर अभियंता पीएस पिंगल का कहना है कि कनालीछीना क्षेत्र में काम पूरा होने के बाद यह लोग अन्य जगह भी काम कर सकते हैं।
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महिलाएं भी करने लगी बीआरओ में काम
सीमा सड़क संगठन को महिलाओं ने भी रोजगार का जरिया बना लिया है। अस्कोड़ा निवासी भागा भंडारी, कनालीछीना निवासी विशना देवी, जानकी देवी, मातोली निवासी देवकी देवी सीमा सड़क संगठन में काम कर अपना घर चला रही हैं। कहती हैं कि घर का खर्च चलाने के बाद कुछ बचत भी कर लेती हैं।