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अनशनकारी की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती कराया
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:32 PM IST
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बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। लछीमा-ओखरानी मार्ग निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच आमरण अनशनकारी की हालत बिगड़ गई। प्रशासन ने अनशनकारी को उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इससे पहले अनशनकारी को उठाते वक्त पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का मुक्की हुई।
बृहस्पतिवार को छठे दिन अनशनकारी 65 वर्षीय मान सिंह कार्की की तबियत बिगड़ गई। चिकित्सीय परीक्षण के बाद प्रशासन ने अनशनकारी को अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला लिया। पुलिस अनशनकारी को उठाने पहुंची। इसे लेकर आंदोलनकारियों और पुलिस में नोक-झोंक के साथ ही धक्का-मुक्की हुई। आंदोलनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। विरोध के बावजूद पुलिस ने अनशनकारी को सीएचसी में भर्ती करा दिया।
इधर, मान सिंह के अनशन स्थल से हटते ही 60 वर्षीय भुवन चंद्र पाठक अनशन पर बैठ गए। इस बीच अनशन स्थल पर पहुंचे एसडीएम और लोनिवि के ईई एलडी पलडिया ने ग्रामीणों को मार्ग निर्माण का आश्वासन दिया और अनशन खत्म करने को कहा, लेकिन ग्रामीण शासनादेश जारी होने तक आंदोलन से पीछे नहीं हटने की बात कहते रहे। इस पर प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान देवी दत्त पाठक, गोपाल मेहता, शेर सिंह कार्की, प्रताप सिंह, दिनेश चंद्र पाठक आदि थे।
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आंदोलनकारियों ने विधायक की मध्यस्थता ठुकराई
बृहस्पतिवार को विधायक मीना गंगोला भी अनशन स्थल पहुंचीं और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश की, लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे ठुकरा दिया। ग्रामीणों ने वित्तीय स्वीकृति का जीओ जारी होने तक अनशन पर डटे रहने का ऐलान किया।
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बृहस्पतिवार को छठे दिन अनशनकारी 65 वर्षीय मान सिंह कार्की की तबियत बिगड़ गई। चिकित्सीय परीक्षण के बाद प्रशासन ने अनशनकारी को अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला लिया। पुलिस अनशनकारी को उठाने पहुंची। इसे लेकर आंदोलनकारियों और पुलिस में नोक-झोंक के साथ ही धक्का-मुक्की हुई। आंदोलनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। विरोध के बावजूद पुलिस ने अनशनकारी को सीएचसी में भर्ती करा दिया।
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इधर, मान सिंह के अनशन स्थल से हटते ही 60 वर्षीय भुवन चंद्र पाठक अनशन पर बैठ गए। इस बीच अनशन स्थल पर पहुंचे एसडीएम और लोनिवि के ईई एलडी पलडिया ने ग्रामीणों को मार्ग निर्माण का आश्वासन दिया और अनशन खत्म करने को कहा, लेकिन ग्रामीण शासनादेश जारी होने तक आंदोलन से पीछे नहीं हटने की बात कहते रहे। इस पर प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान देवी दत्त पाठक, गोपाल मेहता, शेर सिंह कार्की, प्रताप सिंह, दिनेश चंद्र पाठक आदि थे।
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आंदोलनकारियों ने विधायक की मध्यस्थता ठुकराई
बृहस्पतिवार को विधायक मीना गंगोला भी अनशन स्थल पहुंचीं और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश की, लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे ठुकरा दिया। ग्रामीणों ने वित्तीय स्वीकृति का जीओ जारी होने तक अनशन पर डटे रहने का ऐलान किया।