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सीमांत जिले के 5 15-15-30
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पिथौरागढ़। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुई जांच में सीमांत जिले में 58 बच्चे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मिले हैं। अब इनका उपचार कराया जा रहा है।
जिले में कक्षा एक से 12 वीं तक के 1624 स्कूलों के 63109 बच्चों और 1111 आंगनबाड़ी के 24565 नौनिहाल हैं। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत टीम द्वारा वर्ष में एक बार स्कूलों और दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। अप्रैल 2018-19 में 743 बच्चे सामान्य बीमारियों दांत, स्किन, आंख आदि के पाए गए। इनमें से 676 बच्चों ने अस्पतालों में उपचार कराया। इस वर्ष 58 बच्चे गंभीर बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं जिनमें से 10 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित हैं। इनमें से पांच बच्चों की सर्जरी की गई है जबकि अन्य को अभी दवा दी जा रही है।
इनके अलावा होंठ-तालू कटे हुए, हाथी पांव, जन्मजात दृष्टि दोष, सांस संबंधी बीमारी से बच्चे ग्रसित पाए गए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक भुवन चंद्र पांडेय ने बताया कि बीमार बच्चों का पहले पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में इलाज कराया जाता है। ठीक नहीं होने पर उन्हें पहले जांच के लिए डीईआईसी अल्मोड़ा भेजा जाता है। वहां बच्चों की जांच करने बाद बच्चों का देहरादून स्थित फोर्टिस, महंत इंद्रेश और जौलीग्रांट अस्पताल में इलाज कराया जाता है।
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जिले में कक्षा एक से 12 वीं तक के 1624 स्कूलों के 63109 बच्चों और 1111 आंगनबाड़ी के 24565 नौनिहाल हैं। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत टीम द्वारा वर्ष में एक बार स्कूलों और दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। अप्रैल 2018-19 में 743 बच्चे सामान्य बीमारियों दांत, स्किन, आंख आदि के पाए गए। इनमें से 676 बच्चों ने अस्पतालों में उपचार कराया। इस वर्ष 58 बच्चे गंभीर बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं जिनमें से 10 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित हैं। इनमें से पांच बच्चों की सर्जरी की गई है जबकि अन्य को अभी दवा दी जा रही है।
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इनके अलावा होंठ-तालू कटे हुए, हाथी पांव, जन्मजात दृष्टि दोष, सांस संबंधी बीमारी से बच्चे ग्रसित पाए गए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक भुवन चंद्र पांडेय ने बताया कि बीमार बच्चों का पहले पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में इलाज कराया जाता है। ठीक नहीं होने पर उन्हें पहले जांच के लिए डीईआईसी अल्मोड़ा भेजा जाता है। वहां बच्चों की जांच करने बाद बच्चों का देहरादून स्थित फोर्टिस, महंत इंद्रेश और जौलीग्रांट अस्पताल में इलाज कराया जाता है।
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