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माइनस 10 डिग्री सेल्सियस में सड़क बनाने में जुटे हैं ग्रिफ के मजदूर
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शालू दताल
धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन सीमा तक सड़क पहुंचाने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में सीमा सड़क संगठन के कर्मी शून्य से दस डिग्री कम तापमान पर भी काम में जुटे हैं। हीरक परियोजना के तहत 95 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर अब तक नौ पुल भी बना लिए गए हैं। इनमें से 2.20 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन बड़े पुलों का निर्माण पिछले एक साल में किया गया।
सीमा सड़क संगठन ने तवाघाट से लीपूलेख तक लगभग 95 किलोमीटर सड़क के निर्माण का कार्य 2007 से शुरू किया था। तवाघाट से नजंग तक 26 किमी और चीन सीमा की ओर से बूंदी गांव तक 51 किलोमीटर सड़क कटिंग का काम पूरा हो चुका है। अब नजंग से बूंदी तक की 14 किलोमीटर और लीपूलेख में चीन सीमा की ओर चार किमी सड़क की कटिंग का काम किया जाना है।
बेहद दुर्गम और कठिन पहाड़ियों के कारण इस सड़क को बनाने में सीमा सड़क संगठन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी के मुताबिक उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ होने से तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। इसके बावजूद काम को रोका नहीं जा रहा है। इस मार्ग में अब तक नौ पुल बन चुके हैं। इनमें से ग्रिफ ने 100 फीट से अधिक लंबे तीन पुलों का निर्माण एक साल में ही किया है।
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कमान अधिकारी मेजर रोहित कतना ने बताया कि गुंजी से कुटी के बीच नम्फा नाले में 80 लाख रुपये की लागत से 140 फीट, छिलालेख से गर्ब्यांग के बीच चंफू नाले में 80 लाख रुपये की लागत से 120 फीट और कालापानी नाला में 60 लाख रुपये की लागत से 100 फीट लंबे पुल का निर्माण हो चुका है। कमांडर कर्नल सोमेंद्रा बनर्जी ने बताया कि कुटी क्षेत्र मेें अधिक ठंड और लगातार बर्फ गिरने से सड़क निर्माण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन सीमा तक सड़क पहुंचाने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में सीमा सड़क संगठन के कर्मी शून्य से दस डिग्री कम तापमान पर भी काम में जुटे हैं। हीरक परियोजना के तहत 95 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर अब तक नौ पुल भी बना लिए गए हैं। इनमें से 2.20 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन बड़े पुलों का निर्माण पिछले एक साल में किया गया।
सीमा सड़क संगठन ने तवाघाट से लीपूलेख तक लगभग 95 किलोमीटर सड़क के निर्माण का कार्य 2007 से शुरू किया था। तवाघाट से नजंग तक 26 किमी और चीन सीमा की ओर से बूंदी गांव तक 51 किलोमीटर सड़क कटिंग का काम पूरा हो चुका है। अब नजंग से बूंदी तक की 14 किलोमीटर और लीपूलेख में चीन सीमा की ओर चार किमी सड़क की कटिंग का काम किया जाना है।
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बेहद दुर्गम और कठिन पहाड़ियों के कारण इस सड़क को बनाने में सीमा सड़क संगठन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी के मुताबिक उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ होने से तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। इसके बावजूद काम को रोका नहीं जा रहा है। इस मार्ग में अब तक नौ पुल बन चुके हैं। इनमें से ग्रिफ ने 100 फीट से अधिक लंबे तीन पुलों का निर्माण एक साल में ही किया है।
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कमान अधिकारी मेजर रोहित कतना ने बताया कि गुंजी से कुटी के बीच नम्फा नाले में 80 लाख रुपये की लागत से 140 फीट, छिलालेख से गर्ब्यांग के बीच चंफू नाले में 80 लाख रुपये की लागत से 120 फीट और कालापानी नाला में 60 लाख रुपये की लागत से 100 फीट लंबे पुल का निर्माण हो चुका है। कमांडर कर्नल सोमेंद्रा बनर्जी ने बताया कि कुटी क्षेत्र मेें अधिक ठंड और लगातार बर्फ गिरने से सड़क निर्माण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।