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सिविल सेवा परीक्षा में अभ्यर्थियों को फिर मौका मिले
Updated Wed, 29 Aug 2018 10:32 PM IST
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पिथौरागढ़। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में किए गए परिवर्तन के कारण अभ्यर्थी कई मौके गंवा चुके हैं। ऐसे अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने का मौका देने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
अखिलेश सिंह सहित कई अभ्यर्थियों ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग ने 2011 में सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन कर प्रारंभिक परीक्षा में सिविल सर्विस एप्टीट्यूट टेस्ट लागू किया। इसमें इंग्लिश और रीजनिंग के सवालों पर अधिक जोर दिया गया। इस भेदभाव के कारण 2011 से 2014 के बीच हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थियों का सिविल सेवा परीक्षा में सीमित संख्या में चयन हुआ। संघ लोक सेवा द्वारा बनाई निग्वेकर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्र और नॉन इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का चयन सिविल सर्विस में काफी घटने की बात कही।
उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद सिविल सर्विस एप्टीट्यूट टेस्ट के भेदभाव वाले प्रारूप को बदला। साथ ही जिन उम्मीदवारों का 2011 में इसके कारण चयन नहीं हुआ, उन्हें 2015 में एक अतिरिक्त अवसर दिया, लेकिन सरकार ने 2012 से 2015 के बीच अवसर गंवानेे वाले अभ्यर्थियों को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक दो सौ सेे अधिक ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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अखिलेश सिंह सहित कई अभ्यर्थियों ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग ने 2011 में सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन कर प्रारंभिक परीक्षा में सिविल सर्विस एप्टीट्यूट टेस्ट लागू किया। इसमें इंग्लिश और रीजनिंग के सवालों पर अधिक जोर दिया गया। इस भेदभाव के कारण 2011 से 2014 के बीच हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थियों का सिविल सेवा परीक्षा में सीमित संख्या में चयन हुआ। संघ लोक सेवा द्वारा बनाई निग्वेकर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्र और नॉन इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का चयन सिविल सर्विस में काफी घटने की बात कही।
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उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद सिविल सर्विस एप्टीट्यूट टेस्ट के भेदभाव वाले प्रारूप को बदला। साथ ही जिन उम्मीदवारों का 2011 में इसके कारण चयन नहीं हुआ, उन्हें 2015 में एक अतिरिक्त अवसर दिया, लेकिन सरकार ने 2012 से 2015 के बीच अवसर गंवानेे वाले अभ्यर्थियों को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक दो सौ सेे अधिक ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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