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अदालत में सिर्फ 24 दिन चला तेजाब हमले वाला मामला
Updated Tue, 27 Feb 2018 10:40 PM IST
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पिथौरागढ़। तेजाब से हमले वाला केस यहां जिला एवं सत्र न्यायालय में सिर्फ 24 दिन चला और इस दौरान इस मामले में रोज सुनवाई होती रही। जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्रबल्लभ उप्रेती ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के सख्त निर्देश हैं कि ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई हो और आरोपी को सजा शीघ्र सुनाई जाए।
वह बताते हैं कि धारा 326 में वर्ष 2013 में संशोधन भी किया गया था। इसके साथ धारा 326 क भी जोड़ी गई। इसके पीछे यही मंशा रही है कि ऐसे जघन्य मामलों में गवाहों के बयान बदलने एवं मुकरने का मौका न दिया जाए और आरोपी को सजा मिल जाए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने तीन फरवरी से इस मामले की सुनवाई शुरू की और 27 फरवरी को सजा का ऐलान कर दिया। यही नहीं अदालत ने आठों गवाहों के बयान नौ दिन के भीतर दर्ज कर लिए थे।
शासकीय अधिवक्ता उप्रेती का कहना है कि इस मामले की विवेचना करने वाले उपनिरीक्षक प्रेमपाल सिंह ने काफी मेहनत से काम किया और अदालत के सामने सभी तथ्य तेजी से प्रस्तुत किए। उन्होंने जानकारी दी कि पॉक्सो के मामलों में भी इसी तरह तेजी से सुनवाई होती है और फैसला काफी जल्दी आ जाता है। आमतौर पर न्यायालयों में अन्य तरह के मामले कई वर्षों तक लंबित रहते हैं, लेकिन अपने तरह के इस गंभीर मामले को अदालत ने भी काफी गंभीरता से लिया और बिना किसी विलंब के इस पर सुनवाई जारी रखी।
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उप्रेती ने कहा कि ऐसे जघन्य कांड करने वालों को सजा मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए। पिथौरागढ़ के जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। पिथौरागढ़ में तेजाब से हमले की इससे पहले कोई घटना नहीं हुई थी। इस कारण यह मामला काफी चर्चा में रहा था। अदालत के फैसले पर सभी लोगों ने खुशी व्यक्त की है।
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वह बताते हैं कि धारा 326 में वर्ष 2013 में संशोधन भी किया गया था। इसके साथ धारा 326 क भी जोड़ी गई। इसके पीछे यही मंशा रही है कि ऐसे जघन्य मामलों में गवाहों के बयान बदलने एवं मुकरने का मौका न दिया जाए और आरोपी को सजा मिल जाए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने तीन फरवरी से इस मामले की सुनवाई शुरू की और 27 फरवरी को सजा का ऐलान कर दिया। यही नहीं अदालत ने आठों गवाहों के बयान नौ दिन के भीतर दर्ज कर लिए थे।
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शासकीय अधिवक्ता उप्रेती का कहना है कि इस मामले की विवेचना करने वाले उपनिरीक्षक प्रेमपाल सिंह ने काफी मेहनत से काम किया और अदालत के सामने सभी तथ्य तेजी से प्रस्तुत किए। उन्होंने जानकारी दी कि पॉक्सो के मामलों में भी इसी तरह तेजी से सुनवाई होती है और फैसला काफी जल्दी आ जाता है। आमतौर पर न्यायालयों में अन्य तरह के मामले कई वर्षों तक लंबित रहते हैं, लेकिन अपने तरह के इस गंभीर मामले को अदालत ने भी काफी गंभीरता से लिया और बिना किसी विलंब के इस पर सुनवाई जारी रखी।
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उप्रेती ने कहा कि ऐसे जघन्य कांड करने वालों को सजा मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए। पिथौरागढ़ के जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। पिथौरागढ़ में तेजाब से हमले की इससे पहले कोई घटना नहीं हुई थी। इस कारण यह मामला काफी चर्चा में रहा था। अदालत के फैसले पर सभी लोगों ने खुशी व्यक्त की है।