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धारचूला बाजार के दामों के आधार पर बिकेगा खाद्यान्न
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:01 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में हेलीकॉप्टर से पहुंचाए गए राशन के डंप होने की खबर छपने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। पूर्ति विभाग ने सस्ता गल्ला विक्रेताओं को धारचूला बाजार के दामों के आधार पर खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री बेचने के निर्देश दिए हैं। व्यास घाटी के सात गांवों में 513 राशन कार्डधारक हैं, बुधवार से गर्ब्यांग गांव में राशन बंटना शुरू हो गया है।
माइग्रेशन पर गए एक हजार से अधिक लोग व्यास घाटी के गांवों में फंसे हैं। इन गांवों में रहे रहे लोगों के पास खाद्यान्न नहीं है। इस मामले में सीमांत के सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बुदियाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने 14 अक्तूबर को हेलीकॉप्टर से गुंजी को राशन एवं अन्य जरूरी सामान भेजा, लेकिन दाम तय नहीं होने से यह राशन डंप पड़ा था।
अमर उजाला ने बुधवार को यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। जिला पूर्ति विभाग ने उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में सस्ता गल्ला विक्रेताओं से धारचूला बाजार के दाम के आधार पर ही खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री की बिक्री करने के निर्देश दिए हैं। सहायक पूर्ति निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि सस्ता गल्ला विक्रेताओं को ग्रामीणों को राशन उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है। बुधवार से राशन बांटने का काम शुरू कर दिया गया है।
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इन दरों में बिकेगा सामान
रिफाइंड पैकेट- 90 रुपये, दाल अरहर - 60 रुपये, प्याज-25 रुपये किलो, नमक-10 रुपये, दूध पैकेट- 10 रुपये।
सस्ता गल्ला विक्रेता असमंजस में किस परिवार को बांटें राशन
धारचूला। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने राशन तो भेज दिया, लेकिन आबादी के हिसाब से राशन एवं अन्य जरूरत का सामान नहीं भेजा गया है। इससे सस्ता गल्ला विक्रेता भी असमंजस की स्थिति में हैं। इस असमान वितरण पर सीमांत के लोगों में नाराजगी है। रं संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक नबियाल का कहना है कि प्रशासन ने गांवों में आबादी के हिसाब से राशन की आपूर्ति नहीं की है। चावल नहीं भेजा गया। आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद सिर्फ सरकारी कोटे का राशन भेजा, जबकि अतिरिक्त कोटा भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में राशन नहीं भेजने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इधर, हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले महेंद्र बुदियाल ने भी नाराजगी जताते हुए फिर से कोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी दी है।
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माइग्रेशन पर गए एक हजार से अधिक लोग व्यास घाटी के गांवों में फंसे हैं। इन गांवों में रहे रहे लोगों के पास खाद्यान्न नहीं है। इस मामले में सीमांत के सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बुदियाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने 14 अक्तूबर को हेलीकॉप्टर से गुंजी को राशन एवं अन्य जरूरी सामान भेजा, लेकिन दाम तय नहीं होने से यह राशन डंप पड़ा था।
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अमर उजाला ने बुधवार को यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। जिला पूर्ति विभाग ने उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में सस्ता गल्ला विक्रेताओं से धारचूला बाजार के दाम के आधार पर ही खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री की बिक्री करने के निर्देश दिए हैं। सहायक पूर्ति निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि सस्ता गल्ला विक्रेताओं को ग्रामीणों को राशन उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है। बुधवार से राशन बांटने का काम शुरू कर दिया गया है।
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इन दरों में बिकेगा सामान
रिफाइंड पैकेट- 90 रुपये, दाल अरहर - 60 रुपये, प्याज-25 रुपये किलो, नमक-10 रुपये, दूध पैकेट- 10 रुपये।
सस्ता गल्ला विक्रेता असमंजस में किस परिवार को बांटें राशन
धारचूला। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने राशन तो भेज दिया, लेकिन आबादी के हिसाब से राशन एवं अन्य जरूरत का सामान नहीं भेजा गया है। इससे सस्ता गल्ला विक्रेता भी असमंजस की स्थिति में हैं। इस असमान वितरण पर सीमांत के लोगों में नाराजगी है। रं संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक नबियाल का कहना है कि प्रशासन ने गांवों में आबादी के हिसाब से राशन की आपूर्ति नहीं की है। चावल नहीं भेजा गया। आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद सिर्फ सरकारी कोटे का राशन भेजा, जबकि अतिरिक्त कोटा भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में राशन नहीं भेजने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इधर, हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले महेंद्र बुदियाल ने भी नाराजगी जताते हुए फिर से कोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी दी है।