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Pauri News: दीपदान के लिए बाती बना रहीं महिलाएं
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श्रीनगर। कमलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले की तैयारियों के साथ ही शहर में दीपदान की परंपरा निभाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। मान्यता है कि बैकुंठ चतुर्दशी पर परिवार के प्रत्येक सदस्य के नाम से 365 बाती घी में जलाकर भगवान शिव को अर्पित की जाती हैं। श्रद्धालु इस दीपदान से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना करते हैं।
इस परंपरा के चलते इन दिनों श्रीनगर के घरों और मोहल्लों में महिलाएं रूई की बाती बनाने में जुटी हैं। शालिनी, मीनाक्षी, रचना, पूनम, अशिका और चंद्रकला का कहना है कि बाजार में रेडीमेड बाती हैं लेकिन वे घर पर ही हाथों से बाती बनाना पसंद करती हैं। यह वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। यही वजह है कि बैकुंठ चतुर्दशी से पहले शहर के कई घरों में महिलाएं इस परंपरा को निभाने में जुटी हैं। संवाद
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श्रीनगर। कमलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले की तैयारियों के साथ ही शहर में दीपदान की परंपरा निभाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। मान्यता है कि बैकुंठ चतुर्दशी पर परिवार के प्रत्येक सदस्य के नाम से 365 बाती घी में जलाकर भगवान शिव को अर्पित की जाती हैं। श्रद्धालु इस दीपदान से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना करते हैं।
इस परंपरा के चलते इन दिनों श्रीनगर के घरों और मोहल्लों में महिलाएं रूई की बाती बनाने में जुटी हैं। शालिनी, मीनाक्षी, रचना, पूनम, अशिका और चंद्रकला का कहना है कि बाजार में रेडीमेड बाती हैं लेकिन वे घर पर ही हाथों से बाती बनाना पसंद करती हैं। यह वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। यही वजह है कि बैकुंठ चतुर्दशी से पहले शहर के कई घरों में महिलाएं इस परंपरा को निभाने में जुटी हैं। संवाद
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