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सता रहा था गबन के आरोप का डर
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तहसील पौड़ी के फलस्वाड़ी गांव के निवर्तमान ग्राम प्रधान को गबन के आरोप का डर सता रहा था। पंचायत में स्वजल विभाग के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्य हो रहे थे। विभागीय निरीक्षण में कार्यों के पूर्ण न होने और गुणवत्ता में कमी पाई गई थी। विभाग ने कार्य पूर्ण करने या धनराशि विभाग को लौटाने का नोटिस दिया था, लेकिन निवर्तमान प्रधान ने न तो कार्य पूर्ण किए और न ही धनराशि ही विभाग को लौटाई। इस बीच विगत रविवार की रात को उसने जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली थी।
निवर्तमान प्रधान दीपक कुमार ने सुसाइड नोट में स्वजल विभाग के कार्यों के दबाव को खुदकुशी की वजह बताया था। इस संबंध में परियोजना प्रबंधक स्वजल दीपक रावत ने बताया कि फलस्वाड़ी गांव में उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता उप समिति के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्य किए जा रहे थे। इसके लिए ग्राम पंचायत की उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता उप समिति को कार्यदायी संस्था बनाया गया था, जिसका अध्यक्ष ग्राम पंचायत का प्रधान होता है। पंचायत में नालियों का निर्माण, खाद गड्ढे, सोखता गड्ढा और कूड़ाघर बनाया जाना था। विभाग ने निर्माण कार्यों के लिए पंचायत को दो किस्तों में 5 लाख 4 हजार रुपये की धनराशि दी। पंचायत में कार्यों का मूल्यांकन किए जाने पर कार्य 3 लाख 77 हजार 71 रुपए की लागत के पाए गए। मामले में निवर्तमान ग्राम प्रधान को कार्य पूर्ण करने या शेष राशि 1 लाख 26 हजार 929 रुपए विभाग को लौटाए जाने का नोटिस दिया था। निवर्तमान प्रधान ने विभाग से 25 दिनों का समय मांग कार्य पूर्ण किए जाने की बात कही, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कार्यों को पूर्ण नहीं किया गया।
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निवर्तमान प्रधान दीपक कुमार ने सुसाइड नोट में स्वजल विभाग के कार्यों के दबाव को खुदकुशी की वजह बताया था। इस संबंध में परियोजना प्रबंधक स्वजल दीपक रावत ने बताया कि फलस्वाड़ी गांव में उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता उप समिति के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्य किए जा रहे थे। इसके लिए ग्राम पंचायत की उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता उप समिति को कार्यदायी संस्था बनाया गया था, जिसका अध्यक्ष ग्राम पंचायत का प्रधान होता है। पंचायत में नालियों का निर्माण, खाद गड्ढे, सोखता गड्ढा और कूड़ाघर बनाया जाना था। विभाग ने निर्माण कार्यों के लिए पंचायत को दो किस्तों में 5 लाख 4 हजार रुपये की धनराशि दी। पंचायत में कार्यों का मूल्यांकन किए जाने पर कार्य 3 लाख 77 हजार 71 रुपए की लागत के पाए गए। मामले में निवर्तमान ग्राम प्रधान को कार्य पूर्ण करने या शेष राशि 1 लाख 26 हजार 929 रुपए विभाग को लौटाए जाने का नोटिस दिया था। निवर्तमान प्रधान ने विभाग से 25 दिनों का समय मांग कार्य पूर्ण किए जाने की बात कही, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कार्यों को पूर्ण नहीं किया गया।
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