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उत्तराखंड की संस्कृति से विदेशी छात्र हुए प्रभावित
श्रीनगर
Updated Sat, 21 Nov 2015 06:55 PM IST
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उत्तराखंड में परिवार और संस्कारों को बड़ा महत्व दिया जाता है। यहां के लोग भौतिकतावादी जीवन के बजाय आध्यत्मिक जीवन को ज्यादा महत्व देते हैं। उत्तराखंड वास्तव में देवभूमि है। यहां आकर ऐसा लगा जैसे हम अपने ही घर में हों। यह कहना है लीनियस विवि स्वीडन के छात्रों का। लीनियस विवि के छात्र पिछले दस दिनों से गढ़वाल विवि के शैक्षणिक भ्रमण पर थे।
लीनियस विवि की छात्रा विक्टोरिया व सारा का कहना है कि जिस प्रकार का प्यार, अपनापन उन्हें यहां मिला उसे देखते हुए लगता है कि स्वीडन के बाद उत्तराखंड उनका दूसरा घर है। विक्टोरिया ने कहा कि उत्तराखंड के युवा काफी शालीन व संस्कारी होते हैं। छात्रा रोनिया ने कहा कि उत्तराखंड में आकर उन्होंने जाना कि परिवार क्या होता है। यहां परिवार व विवाह को बहुत सम्मान दिया जाता है। जबकि यूरोपीय देशों में ऐसा नहीं है। छात्राओं का कहना था कि यहां के संस्कारों को वह अपने देश मे देखना चाहतेे हैं। उत्तराखंड के लोग भौतिकता के बजाय अध्यात्म को ज्यादा तवज्जो देते हैं जिससे यहां तमाम कठिनाइयों के बावजूद स्थिरता है। छात्रों का कहना था कि उन्हें अवसर मिला तो वह उत्तराखंड में रहना पसंद करेंगे। यहां जीवन में शांति व सुकून है। लीनियस विवि के छात्र 10 दिनों के शैक्षणिक भ्रमण के बाद अपने अनुभवों को साझा कर अपने देश लौट गए हैं।
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लीनियस विवि की छात्रा विक्टोरिया व सारा का कहना है कि जिस प्रकार का प्यार, अपनापन उन्हें यहां मिला उसे देखते हुए लगता है कि स्वीडन के बाद उत्तराखंड उनका दूसरा घर है। विक्टोरिया ने कहा कि उत्तराखंड के युवा काफी शालीन व संस्कारी होते हैं। छात्रा रोनिया ने कहा कि उत्तराखंड में आकर उन्होंने जाना कि परिवार क्या होता है। यहां परिवार व विवाह को बहुत सम्मान दिया जाता है। जबकि यूरोपीय देशों में ऐसा नहीं है। छात्राओं का कहना था कि यहां के संस्कारों को वह अपने देश मे देखना चाहतेे हैं। उत्तराखंड के लोग भौतिकता के बजाय अध्यात्म को ज्यादा तवज्जो देते हैं जिससे यहां तमाम कठिनाइयों के बावजूद स्थिरता है। छात्रों का कहना था कि उन्हें अवसर मिला तो वह उत्तराखंड में रहना पसंद करेंगे। यहां जीवन में शांति व सुकून है। लीनियस विवि के छात्र 10 दिनों के शैक्षणिक भ्रमण के बाद अपने अनुभवों को साझा कर अपने देश लौट गए हैं।
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