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‘जागर और लोक संगीत संरक्षण करने वालों की समझें पीड़ा’
रास डिजीटलमार्ट की ओर से आयोजित कार्यशाला में प्रो. फियोल, प्रो. पुरोहित व प्रीतम भरतवाण और अन्य
- फोटो : SHRINAGAR
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उत्तराखंड की संस्कृति को विदेश तक पहुंचाने और लोक वाद्य यंत्र बजाने वालों की आर्थिकी मजबूत करने के मकसद से रास डिजिटल मार्ट की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमेेें विषय विशेषज्ञों ने संस्कृति के संरक्षण के साथ ही जागर एवं ढोल विद्या को बचाने वालों की आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया गया।
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रास डिजिटल मार्ट की ओर से रविवार देर शाम आयोजित कार्यक्रम में सिनसिनाटी विवि (यूएसए) के एथनोम्यूजिकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो. स्टीफन फियोल ने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म एक दूसरे को समझने का माध्यम है। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति के डिजिटल माध्यम पर सही प्रदर्शन पर जोर दिया।
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जागर सम्राट डॉ. प्रीतम भरतवाण ने कहा कि ढोल बजाने वालों और जागर गाने वालों की पीड़ा समझने की जरूरत है। सरकारी स्कूलों में जागर व मांगल गाए जाने चाहिए। उत्तराखंड के होटलों में पर्यटकों का मांगलों से स्वागत होना चाहिए। एचएनबी गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि लोक संगीत को बढ़ाने के लिए उत्तराखंड से बाहर के लोगों ने भी काम किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रो. एसपी काला ने की। कार्यक्रम आयोजक गढ़वाल विवि एल्युमनी एसोसिएशन के सचिव महिपाल रावत और पवन कोटियाल ने लोक कलाकारों व विशेषज्ञों की मदद से विदेश में उत्तराखंड के लोक संगीत के प्रसार की योजना बनाई जा रही है।
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