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Pauri News: जंगलों को आग से बचाने के लिए फॉरेस्ट फायर एप बनेगा सहारा

Fri, 07 Feb 2025 10:38 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 10:38 PM IST
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This time the Forest Department has prepared a plan to use technology to save the forests from fire.
पौड़ी। इस बार जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने तकनीक के इस्तेमाल की योजना तैयार की है। मोबाइल के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए विभाग ने फॉरेस्ट फायर एप तैयार किया है। साथ ही एफएसआई (फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया) पोर्टल 3.0 पर भी पंजीकरण कर वनाग्नि की जानकारियां लोगों को मिल जाएंगी। विभाग की ओर से वनाग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों में एप डाउनलोड व पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
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मोबाइल एप के माध्यम से वनाग्नि की सूचनाएं एकत्रित करने का पौड़ी वन विभाग की अभिनव पहल है। जिससे वनाग्नि की छोटी से छोटी घटना की जानकारी जुटाई जा सके और आग को बढ़ने से पहले ही रोका जा सके। बीते साल गढ़वाल वन प्रभाग में वनाग्नि की सर्वाधिक 258 घटनाएं व 310.29 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल आग की भेंट चढ़ गए। जिसमें आरक्षित वन प्रभाग में 111 घटनाएं व 198.83 हेक्टेयर जंगल जले। जबकि सिविल वन प्रभाग में 147 घटनाएं व 111.46 हेक्टेयर क्षेत्र में आग लगी। विभाग की मानें तो वनाग्नि की घटनाएं उन क्षेत्रों में अधिक हुई जहां मानव संसाधन नहीं पहुंच पाया। नतीजा यह रहा कि विकराल हुई वनाग्नि से निपटने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी।
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इन घटनाओं से सबक लेते हुए वन विभाग इस बार तकनीकी व जन सहभागिता की योजना के तहत कार्य कर रहा है। विभाग इन दिनों जहां लोगों को जागरूक कर रहा है, वहीं मोबाइल एप के माध्यम से भी लोगों से वनाग्नि की सूचनाएं देने की अपील कर रहा है।
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क्या है फॉरेस्ट फायर एप


विभाग की मानें तो इस एप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने आसपास के वन क्षेत्रों में लगी आग की सूचना क्रू-स्टेशन व मास्टर कंट्रोल रूम तक पहुंचा सकता है। एप को मोबाइल पर प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। जिसमें पंजीकरण करने के बाद व्यक्ति आग की अपडेट स्थिति से वन विभाग को सूचित कर सकता है। साथ ही एप के जरिये प्रभागीय क्षेत्र में कहां-कहां वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं, इसकी भी जानकारी लोगों को मिल सकेगी।

पहले भी सफल रही एप की थ्योरी

विभाग के अनुसार करीब दो साल पहले इसे डीएफओ रुद्रप्रयाग वैभव कुमार सिंह ने विकसित करवाया था। इस एप के माध्यम से वन विभाग क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगाने में सफल रहा। इसी मॉडल को अब पूरे प्रदेश में लांच किया जा रहा है।




क्या कहते हैं अफसर



फायर सीजन से निपटने के लिए विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। एप को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रभाग में 33 क्रू- स्टेशन व एक मास्टर कंट्रोल रूम के साथ ही 60 फील्ड स्टाफ व 82 फायर वॉचर, 24 पीआरडी स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। - पवन नेगी, डीएफओ सिविल एवं सोयम वन प्रभाग पौड़ी।
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