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Pauri News: हिमालय के अध्ययन में आधुनिक तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण
Wed, 09 Sep 2026 06:34 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Wed, 09 Sep 2026 06:34 PM IST
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राष्ट्रीय कार्यशाला में वक्ताओं ने रखे विचार
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिमालय के बदलते स्वरूप, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय चुनौतियों के वैज्ञानिक अध्ययन में आधुनिक तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। जीआईएस, क्यूजीआईएस और गूगल अर्थ इंजन जैसे तकनीकी उपकरण जटिल भौगोलिक आंकड़ों को समझने और उनका विश्लेषण करने में उपयोगी साबित हो रहे हैं। यह बात हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूगोल विभाग की ओर से हिमालय दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में वक्ताओं ने कही।
यूकॉस्ट के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में कार्यवाहक कुलपति प्रो. एनएस पंवार ने कहा कि गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसे सॉफ्टवेयर भूगोल और पर्यावरण अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं जिनके माध्यम से जटिल से जटिल भौगोलिक डेटा और गूढ़ जानकारियों को सरलता से समझा जा सकता है। कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी ने हिमालय की संवेदनशीलता को देखते हुए इसके अध्ययन में आधुनिक तकनीकी के उपयोग पर जोर दिया। प्रो. महावीर सिंह नेगी, प्रो. अनिता रुडोला, प्रो. बीपी नैथानी और चौरास परिसर निदेशक प्रो. आरएस नेगी ने भी विचार रखे। संचालन डॉ. नरेंद्र कुमार ने किया।
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पुस्तक और शोध जर्नल का विमोचन
कार्यशाला के विशेष सत्र में प्रो. महावीर सिंह नेगी और डॉ. सुनील सिंह की ओर से संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक उत्तराखंड के भूगोलवेत्ता के साथ ही जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय की ओर से प्रकाशित ‘भौगोलिक हिमालयन बुलेटिन’ शोध जर्नल का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंटर हिमालय की ओर से डॉ. वीर सिंह को यंग ज्योग्राफर अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। हिमालय के बदलते स्वरूप, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय चुनौतियों के वैज्ञानिक अध्ययन में आधुनिक तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। जीआईएस, क्यूजीआईएस और गूगल अर्थ इंजन जैसे तकनीकी उपकरण जटिल भौगोलिक आंकड़ों को समझने और उनका विश्लेषण करने में उपयोगी साबित हो रहे हैं। यह बात हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूगोल विभाग की ओर से हिमालय दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में वक्ताओं ने कही।
यूकॉस्ट के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में कार्यवाहक कुलपति प्रो. एनएस पंवार ने कहा कि गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसे सॉफ्टवेयर भूगोल और पर्यावरण अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं जिनके माध्यम से जटिल से जटिल भौगोलिक डेटा और गूढ़ जानकारियों को सरलता से समझा जा सकता है। कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी ने हिमालय की संवेदनशीलता को देखते हुए इसके अध्ययन में आधुनिक तकनीकी के उपयोग पर जोर दिया। प्रो. महावीर सिंह नेगी, प्रो. अनिता रुडोला, प्रो. बीपी नैथानी और चौरास परिसर निदेशक प्रो. आरएस नेगी ने भी विचार रखे। संचालन डॉ. नरेंद्र कुमार ने किया।
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पुस्तक और शोध जर्नल का विमोचन
कार्यशाला के विशेष सत्र में प्रो. महावीर सिंह नेगी और डॉ. सुनील सिंह की ओर से संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक उत्तराखंड के भूगोलवेत्ता के साथ ही जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय की ओर से प्रकाशित ‘भौगोलिक हिमालयन बुलेटिन’ शोध जर्नल का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंटर हिमालय की ओर से डॉ. वीर सिंह को यंग ज्योग्राफर अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया।
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