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Pauri News: नवजात शिशुओं में खांसी, जुकाम, निमोनिया के लक्षण
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श्रीनगर। ठंड बढ़ने के साथ नवजात शिशुओं के बीमार होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। शिशुओं में खांसी, जुकाम, निमोनिया के लक्षण देखने को मिलते हैं। ऐसे में ठंड के दौरान बच्चों का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है।
राजकीय उपजिला संयुक्त अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग में सर्दी, जुकाम से ग्रसित नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ रही है। यहां प्रतिदिन ओपीडी में बच्चों में होने वाली आम सर्दी की बीमारी से ग्रसित बीस से अधिक बच्चों आ रहे हैं। दरअसल, सर्दियों के दौरान हवा में नमी और ठंड ज्यादा रहती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस का विकास व संक्रमण तेजी से फैलता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेरणा पंवार ने कहा कि ज्यादातर खांसी, जुकाम के मरीज उनके पास आ रहे हैं। समय पर उपचार न होने के कारण कई बच्चों में निमोनिया की शिकायत भी देखने को मिल रही है। ओपीडी में पहुंच रहे कई नवजात शिशुओं में भी निमोनिया के लक्षण देखे जा रहे हैं। छह माह से कम आयु के शिशु का खास ख्याल सर्दियों में रखने की आवश्यकता है।
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कहा कि अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में छह माह के भीतर ही बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है, बच्चों को एक साल तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कहा कि ठंड के मौसम में बच्चों को सप्ताह में केवल एक बार नहलाए व मालिश करने के साथ कपड़ों पर खास ध्यान दें। कहा कि नवजात शिशुओं के साथ सफाई का ध्यान देने की आवश्यकता भी है।
कमल किशोर पिमोली
राजकीय उपजिला संयुक्त अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग में सर्दी, जुकाम से ग्रसित नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ रही है। यहां प्रतिदिन ओपीडी में बच्चों में होने वाली आम सर्दी की बीमारी से ग्रसित बीस से अधिक बच्चों आ रहे हैं। दरअसल, सर्दियों के दौरान हवा में नमी और ठंड ज्यादा रहती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस का विकास व संक्रमण तेजी से फैलता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेरणा पंवार ने कहा कि ज्यादातर खांसी, जुकाम के मरीज उनके पास आ रहे हैं। समय पर उपचार न होने के कारण कई बच्चों में निमोनिया की शिकायत भी देखने को मिल रही है। ओपीडी में पहुंच रहे कई नवजात शिशुओं में भी निमोनिया के लक्षण देखे जा रहे हैं। छह माह से कम आयु के शिशु का खास ख्याल सर्दियों में रखने की आवश्यकता है।
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कहा कि अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में छह माह के भीतर ही बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है, बच्चों को एक साल तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कहा कि ठंड के मौसम में बच्चों को सप्ताह में केवल एक बार नहलाए व मालिश करने के साथ कपड़ों पर खास ध्यान दें। कहा कि नवजात शिशुओं के साथ सफाई का ध्यान देने की आवश्यकता भी है।
कमल किशोर पिमोली

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