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सीता माता के मेले में उमड़े कौथिगेर

Mon, 23 Nov 2015 05:53 PM IST
पौड़ी
पौड़ी Updated Mon, 23 Nov 2015 05:53 PM IST
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फलस्वाड़ी गांव स्थित सीता माता के मंदिर में लगे मंसार मेले में कौथिगेरों की भीड़ उमड़ आई। मेले में देवल गांव के लक्ष्मण मंदिर से निशाणों को गाजे- बाजे के साथ फलस्वाड़ी लाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर के समीप  सीता माता की शिला के दर्शन किए।
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मेले में साढ़े बारह बजे देवल गांव स्थित लक्ष्मण मंदिर से निशाणों को ढोल-दमाऊ के साथ ध्वज यात्रा के रूप में फलस्वाड़ी स्थित सीता माता मंदिर लाया गया। निशाणों के सीता माता मंदिर पहुंचने के बाद कोटसाड़ा गांव से बबलू घास की रस्सी यानि दौणकंडी को मंदिर लाया गया।
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दिन में करीब डेढ़ बजे से सीता माता मंदिर के समीप के खेत में हाथों से खुदाई कर सीता माता की शिला तलाशने का काम शुरू हुआ। करीब सवा घंटे तक हुई खुदाई के बाद सीता माता की शिला मिली। कोटसाड़ा गांव से लाई गई बबलू घास की रस्सी को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। प्रसाद विवरण के बाद पूजा अर्चना के साथ निशाणों को सीता माता मंदिर से देवल गांव लक्ष्मण मंदिर ले जाया गया।
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देवल गांव के लक्ष्मण मंदिर में कनाडा में रह रहे देवल गांव के प्रवासी जयदीप उप्रेती की ओर से भंडारा आयोजित किया गया। क्षेत्रवासी नितिन उप्रेती, वीरेंद्र पांडे, गणेश भट्ट, देवी प्रसाद भट्ट आदि ने बताया कि मेले को लेकर लोगों में उत्साह रहा।

इसी जगह पर जमीन समाई थी सीता माता
पौड़ी। फलस्वाड़ी गांव स्थित सीता माता मंदिर क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र है। किवदंतियों के अनुसार सीता माता इसी जगह जमीन पर समाई थीं। उनका मानना है कि इस जगह पर जमीन की खुदाई करने पर उनके केश जैसे निकलते हैं। दीपावली के 11 दिन बाद यहां हर साल मेला होता है।  

कई गांवों की ध्वजाएं पहुंचीं
पौड़ी। सीतोंस्यूं पट्टी में सीता माता की याद में मनाने वाले मंसार मेले में ढोल-दमाऊं की थाप पर कोट, देवल, कांडा, कुटसाड़ा, रखूंण, झांजड़, तुणख्या समेत कई गांवों की ध्वजाएं माता के मायके फलस्वाड़ी पहुंची। फलस्वाड़ी गांव की सरहद पर माता की ध्वजा वाहकों का स्वागत परंपरागत तरीके से ढोल-दमाऊं के शब्द बोल धुन पर किया गया।


11वीं सदी का है लक्ष्मण मंदिर
पौड़ी। पुरातत्व विभाग के अनुसार देवल गांव स्थित लक्ष्मण मंदिर 11वीं सदी का है। आज भी लोग इस स्थान पर माता की पूजा करते हैं। देवल के ग्राम प्रधान नितिन उप्रेती, वीरेंद्र पांडे, गणेश भट्ट ने बताया कि सितोंस्यूं पट्टी के हर घर में ध्याणियों (बेटियों) को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। 
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