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केंद्रीय संस्कृत विवि में हिंदी पखवाड़े पर कार्यक्रमों की धूम
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़े के तहत अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों में हिंदी के प्रति रुचि जागृत करने के लिए श्रुतिलेख और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की हिंदी पर पकड़ के लिए हिंदी भाषा सामान्य ज्ञान स्पर्धा आयोजित की गई है। 25 सितंबर को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में 14 सितंबर से हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली की प्राचार्या प्रो. राज भारद्वाज ने कहा कि हिंदी भारत की पहचान है। प्रसन्नता की बात है कि विश्व में हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। मुख्य वक्ता दौलत राम कॉलेज दिल्ली विवि की हिंदी की सहायक आचार्य डा. कुसुम लता ने कहा कि देश का गौरव हिंदी भारतीयों के स्वभाव में रच-बस चुकी है। साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. विजयपाल शास्त्री ने कहा कि बच्चों में हिंदी के साथ ही संस्कृत का संरक्षण और प्रचार-प्रसार भी आवश्यक है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. बनमाली बिश्वाल ने कहा कि हमारी राजभाषा हिंदी का इतिहास डेढ़ हजार वर्षों का है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि हिंदी ने लोकप्रियता के मामले में विश्व की सभी भाषाओं को पछाड़ दिया है। इस मौके पर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. दिनेशचंद्र पांडेय, समीक्षा ध्यानी, दिगंबर रतूड़ी ने भी विचार रखे। मंगलाचरण डॉ. अमंद मिश्र ने किया। स्वागत भाषण डॉ. अरविंद गौर और धन्यवाद ज्ञापन पंकज कोटियाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश बिजल्वाण ने किया।
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श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में 14 सितंबर से हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली की प्राचार्या प्रो. राज भारद्वाज ने कहा कि हिंदी भारत की पहचान है। प्रसन्नता की बात है कि विश्व में हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। मुख्य वक्ता दौलत राम कॉलेज दिल्ली विवि की हिंदी की सहायक आचार्य डा. कुसुम लता ने कहा कि देश का गौरव हिंदी भारतीयों के स्वभाव में रच-बस चुकी है। साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. विजयपाल शास्त्री ने कहा कि बच्चों में हिंदी के साथ ही संस्कृत का संरक्षण और प्रचार-प्रसार भी आवश्यक है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. बनमाली बिश्वाल ने कहा कि हमारी राजभाषा हिंदी का इतिहास डेढ़ हजार वर्षों का है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि हिंदी ने लोकप्रियता के मामले में विश्व की सभी भाषाओं को पछाड़ दिया है। इस मौके पर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. दिनेशचंद्र पांडेय, समीक्षा ध्यानी, दिगंबर रतूड़ी ने भी विचार रखे। मंगलाचरण डॉ. अमंद मिश्र ने किया। स्वागत भाषण डॉ. अरविंद गौर और धन्यवाद ज्ञापन पंकज कोटियाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश बिजल्वाण ने किया।
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