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एचआरडी मंत्री के निर्देश के बाद झुका एनआईटी प्रशासन
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अब एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड में विभिन्न पदों पर होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया जयपुर के बजाय श्रीनगर में ही संपन्न होगी। मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक के निर्देश के बाद एनआईटी प्रशासन को एनआईटी जयपुर (सेटेलाइट कैंपस) में भर्ती कराने के निर्णय से पीछे हटना पड़ा। संस्थान ने ऑफिशियल वेबसाइट में भर्ती स्थल को संशोधित कर दिया है।
वर्ष 2009 में स्थापित एनआईटी उत्तराखंड वर्तमान में दो अलग-अलग स्थानों में संचालित हो रही है। पिछले 10 साल से एनआईटी का अस्थायी कैंपस श्रीनगर के भक्तियाना स्थित आईटीआई और पॉलीटेक्निक के भवनों में संचालित हो रहा है। गत वर्ष छात्रों के आंदोलन के बाद बीटेक प्रथम से तृतीय वर्ष की कक्षाएं राजस्थान के एनआईटी जयपुर (सेटेलाइट कैंपस) में संचालित होने लगी। शेष कक्षाएं श्रीनगर में चल रही हैं।
इस बीच संस्थान ने दिव्यांग और पूर्व सैनिकों के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मांगे। इसमें सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, तकनीकी सहायक, अधीक्षक व आशुलिपिक आदि पदों पर नेत्रहीन, कम दृष्टि, शारीरिक दिव्यांग, मूक-बधिर और पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों की स्थायी नियुक्ति की जानी है। संस्थान ने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को एनआईटी जयपुर बुलाया था। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रगतिशील जनमंच ने उत्तराखंड की एनआईटी के लिए मीलों दूर राजस्थान में भर्ती करने के औचित्य पर सवाल उठाए। हालांकि एनआईटी प्रशासन ने तर्क दिया कि एक्सपर्ट पहाड़ आने से घबराते हैं, इसलिए जयपुर में भर्ती स्थान रखा गया।
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जब विभिन्न माध्यमों से जब यह बात एचआरडी मंत्री निशंक तक पहुंची, तो उन्होंने जयपुर में चयन प्रक्रिया निरस्त करते हुए श्रीनगर में संपन्न कराने के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद एनआईटी के कुलसचिव ने 15 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड की नियुक्ति प्रक्रिया श्रीनगर कैंपस में कराने की जानकारी दी।
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वर्ष 2009 में स्थापित एनआईटी उत्तराखंड वर्तमान में दो अलग-अलग स्थानों में संचालित हो रही है। पिछले 10 साल से एनआईटी का अस्थायी कैंपस श्रीनगर के भक्तियाना स्थित आईटीआई और पॉलीटेक्निक के भवनों में संचालित हो रहा है। गत वर्ष छात्रों के आंदोलन के बाद बीटेक प्रथम से तृतीय वर्ष की कक्षाएं राजस्थान के एनआईटी जयपुर (सेटेलाइट कैंपस) में संचालित होने लगी। शेष कक्षाएं श्रीनगर में चल रही हैं।
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इस बीच संस्थान ने दिव्यांग और पूर्व सैनिकों के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मांगे। इसमें सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, तकनीकी सहायक, अधीक्षक व आशुलिपिक आदि पदों पर नेत्रहीन, कम दृष्टि, शारीरिक दिव्यांग, मूक-बधिर और पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों की स्थायी नियुक्ति की जानी है। संस्थान ने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को एनआईटी जयपुर बुलाया था। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रगतिशील जनमंच ने उत्तराखंड की एनआईटी के लिए मीलों दूर राजस्थान में भर्ती करने के औचित्य पर सवाल उठाए। हालांकि एनआईटी प्रशासन ने तर्क दिया कि एक्सपर्ट पहाड़ आने से घबराते हैं, इसलिए जयपुर में भर्ती स्थान रखा गया।
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जब विभिन्न माध्यमों से जब यह बात एचआरडी मंत्री निशंक तक पहुंची, तो उन्होंने जयपुर में चयन प्रक्रिया निरस्त करते हुए श्रीनगर में संपन्न कराने के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद एनआईटी के कुलसचिव ने 15 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड की नियुक्ति प्रक्रिया श्रीनगर कैंपस में कराने की जानकारी दी।