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Pauri News: हैप्रेक की औषधीय एवं सगंध पादपों के कृषिकरण पर आधारित कृषक मार्गदर्शिका का विमोचन
Sun, 21 Jun 2026 11:35 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:35 PM IST
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श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) की ओर से तैयार की गई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ औषधीय एवं सगंध पादपों के कृषिकरण पर आधारित कृषक मार्गदर्शिका किताब का कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश ने विमोचन किया। कहा कि यह मार्गदर्शिका किसानों, शोधार्थियों और औषधीय पादपों से जुड़े उद्यमियों के लिए उपयोगी साबित होगी।
मौके पर कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि हैप्रेक पिछले चार दशकों से हिमालयी औषधीय एवं संगध पादपों के संरक्षण और कृषिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। वैज्ञानिकों और फिल्ड स्टाॅफ के अथक प्रयासों से कई संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण एवं व्यावसायिक खेती को बढ़ावा मिला है। हैप्रेक के निदेशक डाॅ. विजयकांत पुरोहित ने कहा पुस्तक के प्रकाशन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के वित्तीय सहयोग से कृषक मार्गदर्शिका तैयार की गई है। डॉ. पुरोहित ने कहा कि औषधीय एवं संगन्ध पादप हिमालयी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कृषक मार्गदर्शिका हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को नई दिशा प्रदान करेगी। कृषक मार्गदर्शिका का लेखन हैप्रेक के निदेशक डाॅ. विजकांत पुरोहित सहित डॉ. प्रदीप डोभाल, डॉ. जयदेव चैहान, डॉ. बबीता पाटनी, डॉ. विजय लक्ष्मी और डॉ. सुदीप चंद्र व डाॅ. राजीव वशिष्ठ और कमलेश पंत ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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मौके पर कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि हैप्रेक पिछले चार दशकों से हिमालयी औषधीय एवं संगध पादपों के संरक्षण और कृषिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। वैज्ञानिकों और फिल्ड स्टाॅफ के अथक प्रयासों से कई संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण एवं व्यावसायिक खेती को बढ़ावा मिला है। हैप्रेक के निदेशक डाॅ. विजयकांत पुरोहित ने कहा पुस्तक के प्रकाशन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के वित्तीय सहयोग से कृषक मार्गदर्शिका तैयार की गई है। डॉ. पुरोहित ने कहा कि औषधीय एवं संगन्ध पादप हिमालयी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कृषक मार्गदर्शिका हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को नई दिशा प्रदान करेगी। कृषक मार्गदर्शिका का लेखन हैप्रेक के निदेशक डाॅ. विजकांत पुरोहित सहित डॉ. प्रदीप डोभाल, डॉ. जयदेव चैहान, डॉ. बबीता पाटनी, डॉ. विजय लक्ष्मी और डॉ. सुदीप चंद्र व डाॅ. राजीव वशिष्ठ और कमलेश पंत ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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