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जलसंरक्षण नहीं किया तो भविष्य में संकट : सुरेंद्र नेगी
कोटद्वार
Updated Sun, 15 Nov 2015 08:08 PM IST
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उत्तराखंड विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) और अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के एक दिवसीय सेमिनार में क्षेत्र के 12 विद्यालयों के बच्चों को जल संरक्षण और जल गुणवत्ता प्रबंधन की जानकारियां दी गई।
रविवार को सिताबपुर जलसंरक्षण एवं जल संवर्द्धन को लेकर आयोजित सेमिनार का शुभारंभ प्रदेश के काबीना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने किया। उन्होंने क्षेत्र की नदियों के रिसते पानी और गिरते जल स्तर पर चिंता जताई। कहा कि पहले कोटद्वार की निकटवर्ती नदियों में 12 महीने पानी रहता था, लेकिन प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण पानी रिसता जा रहा है जो कि चिंतनीय है। यदि जलसंरक्षण के लिए अभी से वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए तो वह समय दूर नहीं जब पानी भी कंट्रोल की दुकान पर मिट्टी के तेल की तरह बिकेगा।
उन्होंने कहा जंगलों के अत्यधिक कटान से पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो रहा है। प्रकृति के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ मानव के लिए घातक सिद्ध हो रही है। काबीना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान में पूरे विश्व में जल विज्ञानियों की सबसे बड़ी चिंता जल संरक्षण की ही है। जल संरक्षण केवल सरकारी घोषणाओं अथवा योजनाओं का ढोल पीटने से नहीं होगा। उन्होंने बच्चों से भविष्य में पानी की कमी को पूरा करने के लिए अभी से जलसंरक्षण करने और अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।
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इस अवसर पर यूसर्क एवं यूसैक के निदेशक दुर्गेश पंत, कार्यशाला के संयोजक डा. प्रशांत सिंह, डा.ओपी नौटियाल, पुष्कर सिंह नेगी, डा. एके लोहानी, डा. आशा थपलियाल, जनसंपर्क अधिकारी दर्शन सिंह रावत, चंद्रेश लखेड़ा, मनोज बिष्ट, संदीप बिष्ट, मातवर सिंह आदि मौजूद थे।
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रविवार को सिताबपुर जलसंरक्षण एवं जल संवर्द्धन को लेकर आयोजित सेमिनार का शुभारंभ प्रदेश के काबीना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने किया। उन्होंने क्षेत्र की नदियों के रिसते पानी और गिरते जल स्तर पर चिंता जताई। कहा कि पहले कोटद्वार की निकटवर्ती नदियों में 12 महीने पानी रहता था, लेकिन प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण पानी रिसता जा रहा है जो कि चिंतनीय है। यदि जलसंरक्षण के लिए अभी से वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए तो वह समय दूर नहीं जब पानी भी कंट्रोल की दुकान पर मिट्टी के तेल की तरह बिकेगा।
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उन्होंने कहा जंगलों के अत्यधिक कटान से पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो रहा है। प्रकृति के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ मानव के लिए घातक सिद्ध हो रही है। काबीना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान में पूरे विश्व में जल विज्ञानियों की सबसे बड़ी चिंता जल संरक्षण की ही है। जल संरक्षण केवल सरकारी घोषणाओं अथवा योजनाओं का ढोल पीटने से नहीं होगा। उन्होंने बच्चों से भविष्य में पानी की कमी को पूरा करने के लिए अभी से जलसंरक्षण करने और अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।
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इस अवसर पर यूसर्क एवं यूसैक के निदेशक दुर्गेश पंत, कार्यशाला के संयोजक डा. प्रशांत सिंह, डा.ओपी नौटियाल, पुष्कर सिंह नेगी, डा. एके लोहानी, डा. आशा थपलियाल, जनसंपर्क अधिकारी दर्शन सिंह रावत, चंद्रेश लखेड़ा, मनोज बिष्ट, संदीप बिष्ट, मातवर सिंह आदि मौजूद थे।