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Pauri News: बंदर व लंगूरों से परेशान काश्तकार, बागवानी छोड़ने को विवश

Fri, 17 Jan 2025 11:25 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:25 PM IST
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Farmers troubled by monkeys and langurs, forced to leave gardening

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देवप्रयाग। जहां एक ओर सरकार काश्तकारों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर काश्तकारों की मेहनत से उगाई खेती को बंदर व लंगूर बर्बाद कर रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार की ओर से ठोस पहल न किए जाने पर काश्तकार बागवानी छोड़ने को मजबूर हैं।

देवप्रयाग के निकट गोर्थीकांडा गांव निवासी अब्बल सिंह की उन काश्तकारों में से एक हैं जो बंदरों व लंगूरों के आतंक के शिकार हुए हैं। अब्बल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बंजर पड़े खेतों में परंपरागत खेती के बजाय परिजनों की सहायता और कड़ी मेहनत से विभिन्न प्रजाति के देशी व विदेशी फूल, फलों व उन्नत दालों की नर्सरी तैयार की। जिसमें सात तरह के गुलाब, गेंदे के फूल, सेब, अखरोट, चीकू, लीची, कीनू जैसे फल, मूंग, मसूर, गहथ दाल, वनहल्दी की उन्नत किस्म सहित परशियन नाशपाती, जापानी फल आदि उगाए। इस नर्सरी को बनाने के लिए वह हिमाचल प्रदेश के बायोटेक लैब व अन्य राज्यों से उन्नत बीज लाए। साथ ही उन्होंने सिंचाई के लिए टैंक भी बनवाए। कड़ी मेहनत से बंजर जमीन पर कुछ वर्षो में अखरोट, सेब, दालचीनी, आवंला, कागजी नीबू आदि के करीब 85 पेड़ तैयार हो गए। लेकिन इस नर्सरी पर लंगूरों की नजर पड़ते ही उन्होंने इसे तहस-नहस कर दिया। अपनी कड़ी मेहनत को यूं खराब होता देख वह बेहद हताश हैं। इससे उनके फलदार पेड़ पूरी तरह टूट गए। उन्होंने वन विभाग से लंगूरों से निजात दिलाए जाने की गुहार लगाई। वन कर्मियों की टीम यहां पहुंची, लेकिन लंगूरों से निजात दिलाने में कामयाब नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से सीएम पोर्टल पर भी तीन बार शिकायत की गई, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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रेंजर माणिकनाथ एमएस रावत के अनुसार गोर्थीकांडा में तीन बार वन कर्मियों की टीम भेजी गई। मगर उन्हें कहीं भी लंगूर नहीं दिखाए दिए। प्रभावित काश्तकार को पटाखे भी दिए गए। रेंजर रावत के मुताबिक बंदरों की तरह लंगूरों को पकड़ने की भी वन विभाग तैयारी कर रहा है।
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